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नोटबंदी के बाद मार्केट कमेटी हुई मालामाल

Sun, 11 Dec 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सिरसा। इसे नोटबंदी का असर कहें या फिर मंडी के अधिकारियों की उपलब्धि कि इस बार मार्केट कमेटी में फीस के रूप में सरकार को मिलने वाले राजस्व में बंपर बढ़ोतरी हुई है। मार्च माह तक कपास और धान की आवक से राजस्व में और ज्यादा बढ़ोतरी होगी। इस बार सिरसा जिले से सरकार को राजस्व के रूप में खूब राशि मिलेगी।
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जानकारी के अनुसार मार्केट कमेटी को रिकार्ड फीस हासिल हुई है। पिछले वर्ष के मुकाबले मार्केट कमेटी सिरसा ने चार माह पूर्व ही राजस्व जुटाने के आंकड़े को पार कर लिया है। बीते वित्त वर्ष में मार्केट कमेटी को फीस के रूप में लगभग 16 करोड़ 50 रुपये हासिल हुए थे, वहीं इस बार 30 नवंबर तक मार्केट कमेटी के खाते में में 16 करोड़ 70 लाख रुपये आ चुके हैं। जबकि वित्त वर्ष की समाप्ति में अभी चार माह का राजस्व जुटना है। दरअसल, पीएम मोदी द्वारा गत आठ नवंबर को लागू की गई नोट बंदी का नरमा-कपास और धान की बिक्री पर सीधा हमला किया है। बीते वर्षों में इन कृषि उपज की जमकर बिक्री होती थी। एक अनुमान के अनुसार पचास फीसदी तक माल मार्केट फीस की चोरी करके इधर-उधर किया जाता था। लेकिन नोट बंदी और विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मुस्तैदी के चलते उचंति पर लगाम कसी गई है। व्यापारियों व उद्योगपति उचंति खरीद के लिए करंसी नहीं जुटा पाए। हालांकि कोशिश की गई कि किसानों का नरमा-कपास बाजार भाव से अधिक में पुरानी करंसी की बदौलत खरीदा जाए। एक हजार रुपये प्रति क्विंटल अधिक के भाव लगाए जाने के बाद भी व्यापारियों के मंसूबे सफल नहीं हो पाए। नई करंसी की सीमित उपलब्धता के चलते माल उचंति नहीं खरीदा जा सका, जिसकी वजह से मार्केट कमेटी को फीस हासिल हो पाई। मार्र्केट कमेटी की सचिव जयावंती कासनीया ने कहा कि चोरी से फसल बेचने वालों पर खास नजरें विभाग द्वारा रखी गई हैं। ऐसा करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश पहले से ही दिए जा चुके थे।
नोटबंदी को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा भले ही जितने आरोप जड़े जाते रहे हो। लेकिन भूमिपुत्रों ने कालेधन को रोकने के अभियान में अपनी आहुति डाली है। उन्होंने घर-द्वार पर पुरानी करंसी से नरमा-कपास खरीदने के लिए आने वाले व्यापारियों को साफ इंकार कर दिया। उन्हें नरमा-कपास बाजार भाव से अधिक में खरीदने का प्रलोभन दिया गया था। किसानों ने पुरानी करंसी स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उन्होंने व्यापारियों का मोहरा बनने से इंकार कर दिया और नई करंसी से ही अपनी उपज बेचने की शर्त रखीं। गांव कागदाना के किसान संजीव सिंवर ने बताया कि उसे नरमे के रेट आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल अधिक मिल रहे थे पर शर्त यह थी कि करंसी पुरानी लेनी होगी। मैंने साफ मना कर दिया। किसान अमन सहारण ने बताया कि करंसी के फेर में फसलों को अधिक रेट में बेचना कोई समझदारी नहीं थी इस लिए सारी फसल ऑन रिकॉर्ड बेची है ताकि जे फार्म मिल सकें। बता दें कि उचंति फसल बेचने पर जे फार्म नहीं मिलता जिस कारण कैश को शॉ करने में कठिनाई होती है। अब किसान जे फार्म को लेकर जागरूक हो गए हैं।
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