बीएड कोर्स के लिए होने वाली मारामारी के दिन लद गए चार-चार काउंसलिंग के बाद भी कॉलेजों की सीटें खाली हैं।
सबसे बड़ा कारण कोर्स का दो वर्ष का होना माना जा रहा है। सीटें खाली रहने से कॉलेज प्रबंधकों में चिंता बढ़ती जा रही है।
कभी बीएड में दाखिले के लिए विद्यार्थियों की लंबी लाइनें लगती थीं। अब तो कॉलेज प्रबंधक दाखिले के लिए विद्यार्थियों की राह देखने लगे हैं।
स्थिति यही रही तो अगले सत्र तक कई कॉलेजों को बंद करने तक की नौबत आ सकती है। माना जा रहा है कि बीएड कोर्स दो वर्ष का होने से विद्यार्थियों का इससे मोहभंग हुआ है।
सीडीएलयू के अंर्तगत बीएड के 26 कॉलेज हैं जिनमें से एकमात्र जेसीडी बीएड कॉलेज ऐसा है जहां की सभी सीटें भरी हैं। शेष में काफी सीटें रिक्त रह गई हैं।
कई कॉलेजों में तो 50 प्रतिशत से भी अधिक सीटें रिक्त हैं। ऐसे में उन कॉलेजों को नियमित चला पाना कठिन लग रहा है। बता दें कि इससे पूर्व बीएड का कोर्स एक वर्ष का था।
इसलिए कोर्स को लेकर विद्यार्थियों में क्रेज था। सीडीएलयू के डीन ऑफ कॉलेज डॉ. एसके गहलावत ने भी इसकी पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि कॉलेजों में खाली सीटों के आधार पर कहा जा सकता है कि विद्यार्थी बीएड के कोर्स में दाखिला लेने के प्रति रुझान कम हुआ है।
बीएड के बाद पात्रता परीक्षा को भी इसका एक कारण माना जा सकता है। जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश का कहना है कि कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी विद्यार्थी दाखिले से पूर्व आंकते हैं।
हमने कभी गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। यही वजह है कि हमारे कॉलेज में एक भी सीट न तो बीएड में और न ही एमएड में खाली है।
इसी प्रकार दूसरी काऊंसलिंग के बाद हरियाणा कॉलेज ऐलनाबाद में 100 में से 47 सीटें, रासोबा कॉलेज सिरसा में 200 में से 158 सीटें, त्रिपति कॉलेज रतिया में 200 में से 60 सीटें रिक्त थीं। उसके बाद उक्त कॉलेजों ले अंतिम काउंसलिंग की रिपोर्ट नहीं भेजी है।