रानियां के गांव करीवाला में कब्जा छुड़वाने पहुंचे अधिकारी व पुलिस।
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गांव करीवाला में एक अनपढ़ किसान ने लगभग 60 वर्ष तक कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाकर 16 एकड़ जमीन से कब्जा छुड़वाकर लिया है। कब्जा छुड़वाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिला प्रशासन ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार जितेंद्र कुमार को जिम्मेदारी सौंपी। इसके अलावा कानूनगो महेंद्र सिंह, रोहताश व पटवारी जसवंत सिंह को तैनात किया गया। जिनकी मौजूदगी में पुलिस बल के साथ 16 एकड़ भूमि से कब्जा हटवा कर असली मालिक को हक दिलवा दिया है।
दरअसल भारत पाकिस्तान के बंटवारे से पूर्व गुरदयाल सिंह व विक्रम सिंह पुत्र काला सिंह पुत्र गंडा सिंह नामक दो भाइयों ने पाकिस्तान के लाहौर जिला के गांव जयजाते ने सिरसा जिला के गांव करीवाला में 16 एकड़ भूमि खरीद की। जिसके उपरांत दोनों भाइयों ने काश्त करने व रहनामे के तौर पर महेंद्र सिंह बगैरा को जमीन दे दी। करनैल सिंह के अनुसार उक्त लोगों ने उनकी भूमि पर कब्जा कर लिया जोकि कई सालों तक चलता रहा। इस बीच अनेकों बार पंचायत हुई मामला कोर्ट कचहरी तक पहुंचा लेकिन कहीं भी उन्हें न्याय नहीं मिला। इस दौरान लड़ाई झगड़े में तीन लोगों की कत्ल भी हो गए। इन सब के बावजूद भी करनैल सिंह ने हार न मानते हुए मामला उच्चतम न्यायालय तक ले गए। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके परिवार को हर तरह की यातनाएं व पीड़ा झेलनी पड़ी, लेकिन परमात्मा पर विश्वास करते हुए उन्होंने आखिरी दम तक लड़ाई लड़ने का फैसला लिया। पिछले चार पांच साल तक हाईकोर्ट में केस विचाराधीन होने के उपरांत उन्हें जीत हासिल हुई। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कब्जा छुड़वाने में नाकामयाब रहे। विरोधी पक्ष इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चले गए। वहां पर भी उन्होंने अपना दमदार पक्ष रखते हुए विजय हासिल की। लॉकडाउन के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत प्रभाव से कब्जा छुड़वाने के निर्देश दिए। लेकिन कभी प्रशासनिक अधिकारियों की लेटलतीफी तो कभी पुलिस की सुरक्षा न मिलने के कारण मामला एक वर्ष तक लटकता रहा। जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ड्यूटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र कुमार को भारी पुलिस बल देकर करीवाला में कब्जा कार्रवाई के लिए भेजा। तहसीलदार जितेंद्र कुमार की मौजूदगी में 16 एकड़ भूमि में खड़ी गेहूं की फसल की हल चला कब्जा छुड़वा दिया है।