संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। दिवाली पर प्रदूषण के स्तर में उछाल देखने को मिलता है। इसके अलावा पराली जलाने के मामलों में भी तेजी आती है। ऐसे में इस बार दिवाली पर पराली जलाने की घटनाओं पर रोक के लिए प्रशासन हाई अलर्ट है। कृषि विभाग की टीमें पराली प्रबंधन को लेकर लगी हुई है। दिवाली की रात भी आलाधिकारी गांवों में निगरानी करते हुए नजर आएंगे।
पटाखों के भंडारण को लेकर पुलिस की टीमें निरंतर छापामार कार्रवाई कर रही है। ताकि दिवाली पर केवल ग्रीन पटाखे ही चलाए जाए। इसके बावजूद बड़े स्तर पर पटाखों की मांग देखने को मिल रही है। ऐसे में दिवाली के अवसर पर पटाखों की बिक्री में उछाल देखने को मिल सकता है। पिछले वर्ष के आंकड़ों पर गौर करते तो दिवाली के समय एक्यूआई का लेवल 300 पार पहुंच गया था। उससे पहले एक्यूआई का लेवल 153 के आस पास देखने को मिल रहा था। कुछ ऐसे ही हालात इस वर्ष भी बने हुए हैं। रविवार को एक्यूआई 135 देखने को मिला। हवा चलने और मौसम में उछाल होने के कारण वातावरण साफ देखने को मिल रहा है।
150 के बाद वातावरण होता जाता है प्रदूषित
प्रदूषण बोर्ड के नियम के अनुसार एक्यूआई 150 से जैसे-जैसे ऊपर जाता है, वैसेे-वैसे वातावरण दूषित होने लगता है। 200 से 300 के बीच स्थिति चिंताजनक रहती है और आंखों में जलन जैसे मामले सामने आते हैं। 300 से ऊपर जाने की स्थिति में सांस लेने में दिक्कत आने लगती है। धुएं की एक परत आसमान में छाई रहती है।
एक पराली जलाने का मामला आया
रविवार को पराली जलाने की एक लोकेशन हरसेक प्राप्त हुई है। इसके साथ ही 19 लोकेशन पराली जलाने की अभी तक सामने आ चुकी है। गांव गिदडखेडा में रविवार को पराली जलाने की लोकेशन मिली है। इसकी कृषि विभाग की टीमें जांच कर रही है। लोकेशन सही पाए जाने पर भूमि मालिक के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे। हरसेक के अतिरिक्त विभाग की टीमों की ओर से पराली जलाने के मामले पकड़े जा रहे हैं।
हमारी टीमें निरंतर गांव गांव जाकर जागरूक कर रही है। सभी ग्रामीणों से सहयोग की अपील की जा रही है और व्यवस्था बनाई जा रही है। दिवाली को लेकर विशेष निगरानी रहेगी। -डाॅ. सुखदेव कंबोज, उप निदेशक, कृषि विभाग।