संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले के गांवों में पंचायती जोहड़ों पर वर्षों से चले आ रहे कब्जों के खिलाफ प्रशासन जल्द बड़ा अभियान शुरू कर सकता है। प्रदेश सरकार के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने इसकी तैयारी तेज कर दी है। उपायुक्त ने जिले के सभी तहसीलदारों और उप तहसीलदारों से पंचायती जोहड़ों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
उपायुक्त ने 26 जून को सिरसा, डबवाली, कालांवाली, नाथूसरी चोपटा, ऐलनाबाद, रानियां और गोरीवाला के तहसीलदारों एवं उप तहसीलदारों को पत्र जारी कर अपने-अपने क्षेत्र के जोहड़ों का राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से जोहड़ों के खसरा नंबर, कुल रकबा और राजस्व अभिलेखों के अनुसार विवरण मांगा गया है। यह रिपोर्ट 30 जून तक जिला प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, सरकार प्रदेशभर में पंचायती भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत पहले चरण में सभी जिलों से जोहड़ों की स्थिति और उपलब्ध भूमि का ब्योरा एकत्र किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद कब्जों की पहचान कर कार्रवाई की रणनीति तैयार की जाएगी।
बताया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के उद्देश्य से पंचायती जोहड़ों के लिए भूमि आरक्षित की गई थी। समय के साथ कई स्थानों पर इन जोहड़ों पर अवैध निर्माण, खेती या अन्य प्रकार के कब्जे हो गए। इससे इनका मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है। इसके कारण बरसात के दौरान जल निकासी और जल संरक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी प्रभावित होती हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद जहां भी अवैध कब्जे पाए जाएंगे, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य पंचायती संपत्तियों को सुरक्षित रखना, जल स्रोतों का संरक्षण करना और सार्वजनिक भूमि का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। अब सभी की निगाहें 30 जून के बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।