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Sirsa News: छत पर सुखा रखी थी पुरानी बर्फी, चूरा बनाकर दोबारा से बनाते थे

Mon, 26 Oct 2026 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा। बर्फी को नष्ट करते हुए विभाग की टीम। विभाग
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खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम ने सोमवार को नटार रोड क्षेत्र में चल रही बर्फी बनाने की फैक्टरी पर छापा मारा
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- 400 किलोग्राम बर्फी को करवाया नष्ट, राधे रसगुल्ला भंडार की 250 लीटर चाशनी मिली खराब, गंदगी मिलने पर नाली में डलवाई
- नहीं लिया हुआ था लाइसेंस, नटार रोड पर गोदामनुमा फैक्टरी बनाकर 6 माह से हो रहा काम
फोटो - 40,41,4243
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम ने सोमवार को नटार रोड क्षेत्र में चल रही बर्फी बनाने की फैक्टरी पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान 400 किलो निम्न स्तर की बर्फी मिली। इसे गड्ढे में डालकर नष्ट किया गया। गोदाम की छत पर पुरानी बर्फी को सुखाकर उसका चूरा बना दोबारा बर्फी बनाई जा रही थी।
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह का उत्पाद खाने से कैंसर सहित अन्य बीमारियां हो सकती हैं। विभाग की टीम ने दो सैंपल सफेद व ब्राउन बर्फी के लिए हैं। इनको जांच के लिए मंगलवार को चंडीगढ़ भेजा जाएगा। जल्द सैंपल रिपोर्ट लेकर टीम वापस आएगी ताकि फैक्टरी को बंद करवाया जा सके।
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इसके साथ ही, इस मामले में पुलिस को विभाग की ओर से सूचित किया गया। सोमवार को जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. सुनील बिश्नोई, डॉ. गौरव छाबड़ा, फतेहाबाद फूड सेफ्टी ऑफिसर रवि कुमार की टीम ने नटार रोड पर कार्रवाई की।
छापे के दौरान गोदाम में देखने को मिला कि जहां बर्फी बनाई जा रही है वहां पर कोई सफाई नहीं है। तीन से चार लोग बर्फी बनाने में लगे हुए थे। इस बर्फी को बनाने के लिए गोदाम में दूध ही नहीं था। दूध की जगह मिल्क पाउडर का प्रयोग हो रहा था।
डॉ. गौरव छाबड़ा व डॉ. सुनील बिश्नोई ने बताया कि गोदाम सिद्धार्थ नामक व्यक्ति का है। सिद्धार्थ ने माना है कि वह बिना दूध के अन्य उत्पादों के माध्यम से बर्फी बना रहा था। मौके पर मिल्क पाउडर, फ्लेवर्ड केमिकल, ग्लूकोज सहित अन्य चीज मिली है।
गोदाम मालिक के पास कोई फूड लाइसेंस नहीं है। जिस तरह से मिठाई बनाई जा रही है वह नियमानुसार नहीं है।
पुरानी बर्फी का चूरा मिलाकर दोबारा बना रहे थे बर्फी
डॉ. गौरव छाबड़ा और डॉ. सुनील बिश्नोई ने बताया कि गोदाम मालिक एक्सपायरी व पुरानी बर्फी को नष्ट नहीं करता था। वह बर्फी को सुखाकर दोबारा बर्फी बनाता था। इस तरह की बर्फी का चूरा मौके पर गोदाम में पाया गया है। उसे खत्म किया गया है। साथ ही, विभाग के नियमानुसार फैक्टरी मालिक के खिलाफ कार्रवाई की है। इस तरह की बर्फी को खाने से कैंसर, लिवर आदि संबंधी गंभीर बीमारी हो सकती है। इसलिए शहरवासी अधिकृत दुकानदारों से ही पूरी जांच पड़ताल कर मिठाई खरीदें। ज्यादा रंगों वाली मिठाइयों से परहेज करें।
सस्ती बर्फी बनाकर अलग अलग दुकानों पर बेचा जाता था
जांच के दौरान मौजूद फैक्टरी मालिक सिद्धार्थ ने बताया कि मिल्क पाउडर, सूजी, वनस्पति आदि से बर्फी बनाई जाती है। इस बर्फी को सस्ते दामों पर पैकिंग कर ग्रामीण क्षेत्र में किराना व अन्य दुकानों पर बेचा जाता है। आराम से बर्फी बिक जाती है। फूड लाइसेंस के लिए आवेदन किया था मगर लाइसेंस नहीं मिला। इसलिए बिना लाइसेंस के ही फैक्टरी चलाई जा रही थी।
इन प्रोडक्ट से बना रहा था बर्फी
मिल्क पाउडर
ग्लूकोज
सूजी
वनस्पति घी
सोयाबीन तेल

यहां पर भी मारा गया छापा, 250 लीटर चाशनी डलवाई नाली में
अधिकारियों के अनुसार, सुबह से टीम जांच में लगी हुई है। राधे रसगुल्ला भंडार के गोदाम में सफाई नहीं थी। चाशनी में मक्खियां व अन्य गंदगी थी तो 250 लीटर चाशनी को नाली में डलवा दिया गया। साथ ही हिदायत दी गई कि अगली बार ऐसा होता है तो चालान काटा जाएगा। गणपति रसगुल्ला भंडार, बजाज मिष्ठान भंडार, खुंगर मिष्ठान भंडार से 10 सैंपल लिए गए।
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कोट्स
फैक्टरी में मिठाई का काम बंद है। 400 किलो बर्फी व उसे चूरे को नष्ट किया गया है। बिना लाइसेंस, सफाई आदि को लेकर चालान काटे गए हैं। दो सैंपल लिए गए हैं। कल विशेष कर्मचारी चंडीगढ़ भेजकर जांच करवाई जाएगी ताकि जल्द से जल्द कार्रवाई की जा सके ताकि इस तरह का घटिया पदार्थ आमजन को खाने के लिए न मिले। शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी। लोगों से अपील है कि उनके आसपास इस तरह से मिठाई बनती है तो तुरंत विभाग को सूचित करें।
-डॉ. गौरव छाबड़ा, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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