संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शिक्षा विभाग की ओर से विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से राजकीय विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ संचालन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालय प्रमुखों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाने के आदेश दिए गए हैं।
विभाग की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अब विज्ञान शिक्षा केवल सैद्धांतिक न रहकर पूर्णत: प्रयोगात्मक और गतिविधि-आधारित होगी। इसके तहत सभी विज्ञान प्राध्यापक एवं अध्यापक नियमित रूप से प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों से प्रयोग, मॉडल निर्माण, प्रोजेक्ट कार्य एवं नवाचार गतिविधियां करवाएंगे। इन सभी गतिविधियों का विधिवत रिकॉर्ड लॉगबुक में संधारित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
इसके अतिरिक्त विद्यालयों में उपलब्ध विज्ञान एवं गणित किट्स/सामग्री के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी उपकरण अनुपयोगी या सीलबंद अवस्था में न रहे। निरीक्षण के दौरान लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अध्यापक की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
नोडल अधिकारी होंगे नियुक्त : सप्ताह में दो दिन प्रार्थना सभा के दौरान विज्ञान उपकरणों का प्रदर्शन, छोटे-छोटे प्रयोग एवं रोचक गतिविधियां करवाई जाएंगी। इस कार्यक्रम की रिपोर्ट एवं छायाचित्र नियमित रूप से संधारित एवं साझा किए जाएंगे तथा इसके लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा। विद्यालयों में आनंदमय शनिवार के अंतर्गत विज्ञान आधारित क्विज, मॉडल एवं नवाचार का आयोजन कर विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सभी विद्यालयों में विज्ञान कक्षाओं की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए।
विज्ञान शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए विद्यार्थियों एवं अध्यापकों की विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी जिनमें इंस्पायर अवाॅर्ड मानक योजना, विज्ञान संगोष्ठी, विज्ञान नाटक, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी, जिलास्तरीय विज्ञान प्रश्नोत्तरी एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता, पृथ्वी विज्ञान ओलंपियाड, बुनियाद एवं सुपर-100 जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।