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खाते अपडेट ना होने के चलते राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों के रूके वर्दी व किताबों की राशि

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सिरसा। राजकीय स्कूलों में पहली से आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों के खातों में डाली जाने वाली ड्रेस व किताबों की राशि से अभी भी 20 फीसदी विद्यार्थी वंचित है यानी 20 हजार से अधिक बच्चे बिना ड्रेस, जूते-जुराब ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाने को मजबूर है। जिले के 830 स्कूलों के विद्यार्थियों के खातों को अपडेट करना था, लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो पाया। जिले के छह प्राथमिक स्कूल ऐसे है जिनमें एक भी बच्चे का खाता वेरिफाई ना होने के चलते किसी भी बच्चे के खाते में राशि नहीं आई। पहली से आठवीं कक्षा तक के 1 लाख 3 हजार 457 विद्यार्थियों को निदेशालय की ओर से फीस व किताबों के लिए राशि डाले जाने है।
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कोरोना काल के बाद शुरू हुआ स्कूलों में जाने वाले भत्तों को लेकर नए पोर्टल पर खातों को अपडेट करना था। ताकि बच्चों को दी जाने वाली सुविधाएं व भत्ते सीधे उनके खातों में डाले जा सके। जिले के 830 राजकीय स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा तक करीब 1 लाख 50 हजार 657 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है। जिसमें से 1 लाख 39 हजार 55 बच्चों के खातों को शिक्षा निदेशालय ने वेरिफाइड कर दिया है। 830 स्कूलों में से 71 स्कूल ऐसे है, जिनका डाटा अभी तक 100 फीसदी पूरा नहीं हुआ है। 71 में से 6 प्राथमिक स्कूल राजकीय प्राथमिक स्कूल, ढाणी उद्यम नगर, बाजेका, राजकीय प्राथमिक स्कूल गोरीवाला, राजकीय प्राथमिक स्कूल गुरुनानक पूरा, राजकीय प्राथमिक स्कूल नंबर 1 सिरसा, राजकीय प्राथमिक स्कूल कासन खेरा और राजकीय प्राथमिक स्कूल ढाणी साधा सिंह बाजेंका में पढ़ने वाले 388 में से किसी भी बच्चे के खाते में राशि नहीं डाली गई है। सर्दियां शुरू हो चुकी लेकिन पहली से पांचवी कक्षा के इन बच्चों के खाते में अभी तक एक पैसा नहीं आया है। निम्न वर्ग के यह बच्चे सर्दी की वर्दी लेने के लिए विभाग की राशि के इंतजार में बैठे है। अन्य 65 स्कूलों के खाते 80 से 98 फीसदी तक वेरिफाई किए गए है।
पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के वर्दी व किताबों के आने थी राशि
राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से पांचवी कक्षा तक के 65 हजार 262 विद्यार्थियों को वर्दी व किताबों की राशि दी जानी थी। वहीं छठी से आठवीं कक्षा तक के 38195 विद्यार्थियों को केवल वर्दी की राशि जारी होनी थी। छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को दी जाने वाली किताबों के जिला स्तर पर टेंडर हुए थे लेकिन टेंडर में बच्चों तक किताबें पहुंचने की निर्धारित अवधि के एक माह बीत जाने के बाद भी किताबें विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाई।
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स्कूल को राशि डालने की प्रक्रिया निदेशालय अपने स्तर पर कर रहा है। जिन स्कूलों ने खाते अपडेट नहीं किए उन्हें बुलाकर कारण पूछ उसे सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
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- आत्मप्रकाश मेहरा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सिरसा।
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