अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
बच्चे शाम को पार्क में जाने की जिद करते हैं, लेकिन अभिभावकों की मजबूरी यह है कि शहर के अधिकतर पार्कों की हालत बदहाल हो चुकी है। इसलिए वो बच्चों को पार्क में नहीं ले जा सकते। पार्कों में हर तरफ गंदगी पसरी हुई है। झूले टूटे पड़े हैं और फाउंटेन फव्वारे भी काफी अरसे से बंद हैं। लावारिस पशु पार्कों में विचरते रहते हैं।
शहर के पटेल बस्ती स्थित जीवन सिंह जैन पार्क सहित सभी पार्कों की हालत ऐसे ही बनी हुई है। 2004 में लालबत्ती चौक के पास बनाया गया टाउन पार्क सिरसा का दिल माना जाता था। एक करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च कर पुरानी जेल के स्थान पर बनाए गए इस पार्क में 15 लाख से फाउंटेन फव्वारे लगाए गए। अनेक झूले बनाए गए। अब पिछले काफी सालाें से फव्वारा बंद पड़ा है। इसका कारण यह है कि करीब तीन लाख की आबादी वाले सिरसा शहर में ग्रीनरी को लेकर कोई संजीदा नहीं है।
शहर में पार्क तो अनेक बने पर उनका रखरखाव उचित तरीके से नहीं हुआ। अकसर पार्कों की देखरेख को लेकर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर परिषद में खटकती रही है। अभी कुछ समय पहले हुडा ने ए, बी, सी, डी, ई, अनाजमंडी और इंडस्ट्रियल एरिया के पार्क मंडी टाउनशिप को दे दिए। हुडा के पास इस समय सेक्टर 19 और 20 में करीब 16 छोटे-बड़े पार्क हैं। इसके अलावा हुडा के पास ही शहर का भादरा पार्क, टाउन पार्क, रानियां रोड स्थित ग्रीन बेल्ट पार्क है। इसके अलावा एफ ब्लॉक में 6 पार्क हैं। कुल मिलाकर हुडा के पास 30 के करीब पार्क हैं और इतने पार्कों को संभालने के लिए विभाग के पास महज एक ड्राइवर एवं तीन माली हैं। ऐसे में अधिकतर पार्कों को विभिन्न मोहल्लों के रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन या समाजसेवी संस्थाओं ने संभाला हुआ है। मसलन भादरा पार्क को सिरसा केयर सोसायटी ने गोद लिया हुआ है। सोसायटी के सचिव अमित सोनी बताते हैं कि करीब एक बरस पहले उन्हाेंने पार्क गोद लिया। पूरे पार्क में गंदगी का आलम था। 10 ट्राली गंदगी और मलबा हटवाया। अभी पार्क में 18 बेंच लगाए गए हैं। पार्क में एक शेड बनवाया जाएगा, ताकि बरसात के दिनों में भी लोग यहां सैर कर सकें।
असामाजिक तत्वों का अड्डा बने पार्क
पार्कों को कोई संभालने वाला नहीं होने के कारण लावारिस पशु पार्कों में घुस आते हैं और गंदगी फैलाते हैं। यहां लोग बड़े आराम से बैठकर ताश की बाजियां लगाते हैं। धूम्रपान करते हैं, शराब पीते हैं और इन्हें ऐसा करने से रोकने वाला कोई नहीं होता। पार्क के बदतर हालात के कारण अब लोगों ने यहां सैर-सपाटा करना छोड़ दिया है। जिला प्रशासन भी इस अभियान में बड़े उत्साह के साथ आहुति डाल रहा है, लेकिन इस अभियान को पलीता लगाने वाले लोगों की भी कमी नहीं।
सफाई की हालत है खस्ता
शहर के विभिन्न पार्कों पर नजर डालें तो यहां सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है, जिनके कंधों पर इन पार्कों के रख-रखाव की जिम्मेवारी है, वे खर्राटे भर रहे हैं और हर महीने सरकार को लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं क्योंकि रख-रखाव के बदले ये लोग सरकार से रकम वसूल करते हैं। मगर काम बिलकुल नहीं कर रहे। आर्य स्कूल के सामने स्थित डीसी पार्क, भादरा तालाब पार्क का हाल तो सबसे बुरा है। यहां झूले टूट चुके हैं, फव्वारे उखड़ चुके हैं। जगह-जगह पार्क में गंदगी पसरी हुई है।
ग्रीन बेल्ट दयनीय स्थिति में
शहर में काफी पार्क पिछले दो दशक में बने। पार्क बने तो हरियाली की आस बंधी। 22 एकड़ में नगर में ग्रीन बेल्ट भी बनाई गई। पार्कों से हरियाली गायब है अधिकांश पार्कों में पेड़-पौधों का नाम नहीं है। बस एक बड़ी जगह पर चारदिवारी नजर आती है।
पर्यावरण के प्रति नहीं संजीदगी
सिरसा शहर पर्यावरण के लिहाज से पिछड़ा हुआ है। पर्यावरण के प्रति न शासकीय वर्ग चिंतित दिखाई पड़ता है, न प्रशासकीय और न ही आमजन। सिरसा जिला 4277 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में भी पेड़-पौधे नहीं हैं। पौधे कम हैं, इसलिए मौसम का मिजाज भी बिगड़ा हुआ है। बेमौसम में बरसात होती है और सावन में बदरा बरसते नहीं है। शहर में ग्रीनरी नहीं होने के कारण ही कि हर सड़क और गली धूूल का दरिया बन गई है।
एक ड्राइवर और तीन माली हैं
हमारे पास नियमित रूप से एक ड्राइवर एवं तीन माली हैं। अधिकांश पार्कों को हुडा रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के हवाले किया हुआ है। सभी पार्कों में उचित सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यालय में लिखा हुआ है। पार्कों एवं ग्रीन बेल्ट में पौधे लगाने के लिए विभाग एक नर्सरी है।
-सुरेंद्र शर्मा, उपमंडल अधिकारी, हुडा, सिरसा।