बड़ागुढ़ा स्थित दी केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखा में उपभोक्ता ने मचाया हंगामा तो राशि हुई ट्रांसफर
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- कैशियर ने अवैध रूप से 12 एंट्री में खाते से निकाले पैसे-
तीन शाखा प्रबंधकों के कार्यकाल में हुई एंट्री
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ागुढ़ा/ओढां। उपभोक्ताओं की रकम बैंकों में भी सुरक्षित नहीं है। उपभोक्ता बैंक में आया ही नहीं और उसके खाते से कैशियर ने कथित रूप से लाखों रुपये की राशि इधर-उधर कर दी। यह कारनामा बुधवार को सामने आया है गांव बड़ागुढ़ा में स्थित दी केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखा में।
बैंक के कैशियर सुभाष ने कथित रूप से गबन के उद्देश्य से एक वृद्धा के खाते से लाखों रुपये की राशि निकालकर कुछ अन्य खाते में ट्रांसफर कर दी और कुछ नकद निकलवा ली। मामला उस वक्त सामने आया जब वृद्धा नसीब कौर निवासी गांव बड़ागुढ़ा अपनी बेटी सुखपाल कौर के साथ बैंक में आई। जब वृद्धा ने अपनी पासबुक प्रिंट करवाई तो ट्रांजेक्शन देखकर उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। वृद्धा के खाते में 10 लाख 3 हजार रुपये थे। इसमें से 7 लाख 35 हजार रुपये की राशि कम पाई गई।
जब इस बारे वृद्धा ने पूछा तो उसे उत्तर मिला कि आपके खाते से उक्त राशि निकल गई है। वृद्धा ने जब यह कहा कि वह तो काफी समय से बैंक में आई ही नहीं, तो उक्त राशि कैसे कम हो गई। यह सुनकर शाखा प्रबंधक व अन्य कर्मचारियों में खलबली मच गई। मौके पर मौजूद शाखा प्रबंधक इंद्रपाल इस मामले में सीधे तौर पर बचते नजर आए।
शाखा प्रबंधक ने यह कहकर पल्ला झाड़ना चाहा कि यह तकनीकी त्रुटि की वजह से हुआ है। सवाल य है कि तकनीकी त्रुटि 1-2 बार हो सकती है। जबकि ऐसा 12 बार हुआ। वृद्धा व उसकी बेटी ने खाते की स्टेटमेंट निकलवाई तो उसमें पाया कि उसके खाते में से 12 बार में कुल 7 लाख 35 हजार रुपये निकाले गए हैं। इसमें से कुछ एक अन्य खाते में ट्रांसफर किए गए हैं जबकि कुछ नकद निकलवाए गए हैं।
बुधवार को इस मामले को लेकर वृद्धा व उसके परिजन बैंक में पहुंचे। इस दौरान पैसे को लेकर बैंक में काफी देर तक बहसबाजी होती रही। मामला मीडिया तक पहुंचने के बाद उपभोक्ता के खाते में उक्त राशि वापस ट्रांसफर भी कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की भनक लगते ही कैशियर सुभाष छुट्टी लेकर रफूचक्कर हो गया। शाखा में काफी गहमा-गहमी रही। मौके पर मौजूद उपभोक्ता भी अपने खाते की राशि को लेकर चिंतित दिखे।
वृद्धा नसीब कौर के मुताबिक, उसने ये राशि अपनी दोहती की शादी के लिए जमा की थी। वह लंबे समय से बैंक में आई ही नहीं और न ही उसने वाउचर पर अंगूठा लगाया। अब सवाल यह है कि जब वृद्धा ने अंगूठा या हस्ताक्षर किए ही नहीं तो उसके खाते से कैशियर ने इतनी राशि दूसरे खातों में कैसे ट्रांसफर कर दी।
मौके पर मौजूद कैशियर बलवंत सिंह ने पूछे जाने पर यह कहा कि उन्हें इस बारे कोई जानकारी नहीं है। वह तो अभी 5-6 दिन पहले बैंक में आए हैं। यह राशि कैशियर सुभाष द्वारा ट्रांसफर की गई है।
12 एंट्री में निकले 7 लाख 35 हजार
कैशियर सुभाष द्वारा मनी ट्रांसफर का यह खेल 4 जुलाई 2025 से शुरू किया गया। इसमें वृद्धा नसीब कौर के खाते से 4 जुलाई 2025 को 50 हजार रुपये, 6 अगस्त 2025 को 50 हजार रुपये, 7 अगस्त 2025 को 50 हजार, 11 अगस्त को 2 लाख 50 हजार, 12 अगस्त 2025 को 46 हजार, 13 अगस्त 2025 को 33 हजार, 15 सितंबर 2025 को 23 हजार 500, 3 अक्तूबर 2025 को 22 हजार 500, 8 अक्तूबर 2025 को 35 हजार, 24 दिसंबर 2025 को 50 हजार, 29 दिसंबर 2025 को 50 हजार व 22 जनवरी 2026 को 10 हजार रुपये सहित कुल 12 एंट्री में 7 लाख 35 हजार रुपये की राशि निकाली गई।
यह होता है प्रोसेस
उपभोक्ता जब बैंक में पैसे निकलवाने आता है तो उसे विड्रॉल फार्म भरकर उस पर अपने हस्ताक्षर या अंगूठा लगाकर पासबुक सहित फार्म कैशियर को देना होता है। फिर कैशियर द्वारा उस फार्म को ऑनलाइन रूप से वेरिफाई कर उस पर डीसी नंबर लगाया जाता है। फिर यह फार्म शाखा प्रबंधक के पास जाता है और शाखा प्रबंधक उसे वेरिफाई करता है। उसके बाद कैशियर द्वारा उपभोक्ता को राशि दी जाती है या फिर उपभोक्ता के कहने पर अन्य खाते में ट्रांसफर की जाती है। जबकि इस मामले में कैशियर द्वारा नियमों को दरकिनार कर पेमेंट ट्रांसफर कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक, कैशियर सुभाष ने कथित तौर पर उपभोक्ता के बैंक में आए बिना ही फर्जी रूप से शाखा प्रबंधक की आईडी से वेरिफाई करते हुए यह गोलमाल किया है। इस मामले में दूसरा बड़ा सवाल यह भी है कि अगर शाखा प्रबंधक इस मामले में शामिल नहीं हैं तो उन्होंने अपनी आईडी वेरिफिकेशन चेक क्यों नहीं की। बताया जा रहा है कि यह मनी ट्रांसफर का खेल मौजूदा शाखा प्रबंधक इंद्रपाल, तत्कालीन प्रबंधक बलवंत सिंह व धर्मपाल के समय में हुआ।
मेरी अभी यहां पर पोस्टिंग हुई है। उपभोक्ता हमारे पास शिकायत लेकर आया था, उसके खाते से राशि निकाली गई है। यह राशि कैशियर सुभाष द्वारा ट्रांसफर की गई थी। हां, गलती तो है, हमने इस बारे में स्थापना अधिकारी को अवगत करवाते हुए महाप्रबंधक सिरसा को लिख दिया है। यह सब तकनीकी त्रुटि की वजह से हुआ। हमने अब राशि दोबारा उपभोक्ता के खाते में डाल भी दी है।
- इंद्रपाल, शाखा प्रबंधक, दी केंद्रीय सहकारी बैंक शाखा बड़ागुढ़ा
यह मामला अब तक मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- ऋषिपाल, महाप्रबंधक, सीबी सिरसा