नाथूसरी चोपटा।
गांव दड़बा कलां के समीप शेरांवाली माइनर में रविवार सुबह अचानक दरार आ गई, जिससे 100 एकड़ भूमि में जलभराव होने से गेहूं अंकुरित फसल खराब हो गई। नहर टूटने की सूचना पाकर सिंचाई विभाग के कनिष्ठ अभियंता और बेलदार मौके पर पहुंचे। नहर को नहराना हैड से बंद करवाया गया। इसके बाद नहर में आई दरार को जेसीबी और ट्रैक्टरों की सहायता से ठीक करने कार्य शुरू कर दिया। उधर, पीड़ित किसानों ने मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
शेरांवाली नहर में सुबह छह बजे बुर्जी नंबर 24800 के समीप अचानक दरार आ गई, जिससे किसान छबीलदास के खेत में जलभराव होने लगा। खेतों में सिंचाई कर रहे किसानों ने नहर टूटने की सूचना तुरंत सिंचाई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दी। नहर में करीब 75 फुट तक लेफ्ट साइड में कटाव हो गया। सिंचाई विभाग के कनिष्ठ अभियंता रमेश कुमार और बेलदार मौके पर पहुंचे। उन्होंने नहर को नहराना हैड से बंद करवाया।
इन किसानों के खेतों में हुआ नुकसान
शेरांवाली नहर टूटने से गेहूं बिजाई की करीब 100 एकड़ भूमि पर जलभराव हो गया। जिससे किसानों को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। नहर टूटने से किसान संदीप बैनीवाल की 20 एकड़, रामचंद स्वामी, बंसीलाल, सतपाल, मेघराज, कृष्ण, बलवंत, दलीप सिंह की सात-सात एकड़, भरत सिंह बैनीवाल, उम्मेद, छबीलदास, भूराराम गोदारा की दो दो एकड़ भूमि पर गेहूं बिजाई की फसल खराब होने की जानकारी मिली है। किसानों ने कहा कि गेहूं की कई दिन पहले ही बिजाई की थी। अभी बिजाई करने का समय भी निकल रहा है, क्योंकि गांव में सेम होने के कारण भूमि पर कई दिन तक जलभराव रहेगा। इससे दूसरी कोई भी फसल की बिजाई नहीं कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को मुआवजा दिया जाए। जिससे नुकसान की भरपाई की जा सके।
क्या कहते हैं अधिकारी
वहीं, विभाग के अधिकारी जेई रमेश कुमार ने बताया कि नहर की पटरी के साथ कई वृक्ष कंडम अवस्था में थे, जिन्हें काटने के लिए वन विभाग को कई बार अवगत करवाया गया है, लेकिन कोई गौर नहीं किया गया। वृक्षों के कारण ही मिट्टी का कटाव हुआ और दरार आ गई, जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।