ओढ़ा। टीकाकरण अभियान के बारे में जानकारी लेते उपनिदेशक डॉ. सुखविन्द्र चौहान। (विभाग)
- फोटो : कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक लेते डीएम रमेश रंजन। स्रोतः प्रशासन
ओढां। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से पशुओं में होने वाले मुंहखुर व गलघोंटू रोग का संयुक्त टीकाकरण 23 अक्तूबर शुरू किया जा चुका है। इसके लिए वेटनरी सर्जन की देखरेख में क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग टीमें बनाई गईं हैं जोकि घर-घर जा कर पशुओं का निशुल्क टीकाकरण कर रही हैं।
विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुखविंद्र चौहान ने बताया कि टीकाकरण वर्ष में दो बार किया जाता है। वर्ष 2025 में ये प्रथम टीकाकरण है। उन्होंने बताया कि चार माह से ऊपर के सभी पशुओं का टीकाकरण करना निश्चित किया गया है। वहीं सात माह से ऊपर के गाभिन पशुओं को फिलहाल ये टीका नहीं लगाया जाएगा, उसे टीका ब्याने के बाद लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिला में 4 लाख 34 हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। जबकि चार लाख 34 हजार 16 डोज आई है। अब तक एक लाख 5 हजार 633 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। जिले में कुल 65 राजकीय पशु अस्पताल व 163 राजकीय पशु औषधालय हैं। ये टीकाकरण अभियान 22 नवंबर तक चलेगा।
डॉ. चौहान ने बताया कि इस अभियान में किसी तरह की त्रुटि न रहे इसके लिए विभाग की ओर से टीकाकरण का निरीक्षण भी किया जा रहा है। उन्होंने पशुपालकों से आह्वान किया कि इस टीकाकरण में विभाग का सहयोग करें। उन्होंने लोगों में टीकाकरण के प्रति फैली भ्रांति का निवारण करते हुए कहा कि टीकाकरण से पशु के स्वास्थ्य या दुग्ध उत्पादन पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता। पशु के नियमित आहार पर थोड़ा ध्यान देने पर पशु का दुग्ध उत्पादन सामान्य हो जाता है।
खतरनाक बीमारी है मुंहखुर व गलघोंटू
डॉ. सुखविंद्र चौहान ने बताया कि मुंहखुर व गलघोंटू खतरनाक रोग हैं। मुंहखुर में पशु के मुंह व खुर में छाले पड़ जाते हैं। इसके चलते पशु को चारा खाने व चलने में दिक्कत हो जाती है। वहीं गलघोंटू में पशु को तेज बुखार, गले में सूजन, सांस न ले पाना सहित अन्य समस्याएं आती हैं। इससे पशु के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन पर काफी विपरीत असर पड़ता है यहां तक कि पशु की मृत्यु भी हो जाती है। उन्होंने पशुपालकों से आह्वान किया कि टीम उनके घर द्वार पर ही पहुंचकर पशुओं का निशुल्क टीकाकरण कर रही है। यह पशुओं के लिए बेहद जरूरी है इसलिए अपने पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवाएं।