अमर उजाला ब्यूरो
डबवाली।
डबवाली अग्निकांड के शहीदों की 22वीं बरसी पर शनिवार को प्रियजनों ने आंखों में आंसू भरकर अपनों को याद किया। 22 साल पहले मिले जख्म भले ही वक्त ने भर दिए हों, पर आज भी अपनों को खोने का दर्द उतना ही नजर आ रहा था। अग्नि पीड़ित संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में घटनास्थल पर शहर के लोगों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। लोगों ने मृतकों के चित्रों पर पुष्प अर्पित के साथ ही सर्व धर्म प्रार्थना सभा में उनकी आत्मिक शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। लोगों ने पीड़ितों की मांगें पूरी नहीं करने पर सरकारों को कोसा।
एसडीएम रानी नागर ने भी अग्निकांड स्मारक पर पहुंचकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से लगाए गए मेगा ब्लड डोनेशन कैंप में 968 से ज्यादा लोगों ने रक्तदान किया। शिविर में पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान से आई टीमों ने ब्लड एकत्रित करने का कार्य किया। शिविर में गांव चौटाला की सिखांवाली ढाणी से पहुंचे नवविवाहित जोडे़ सुशील-पुष्पा ने एक साथ रक्तदान किया।
इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम रानी नागर, तहसीलदार विजय मोहन स्याल, नायब तहसीलदार अजय कुमार, नायब तहसीलदार महेंद्र कुमार, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. केवी सिंह, विधायक नैना सिंह चौटाला, भाजपा नेता देव कुमार शर्मा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष टेक चंद छाबड़ा, रणवीर सिंह राणा, सर्वजीत सिंह मसीतां, कृष्णा फौगाट, जिला कष्ठ निवारण समिति सदस्य सतीश जग्गा, विजय वधवा, व्यापार मंडल के गुरदीप कामरा, एडवोकेट अंजू अरोड़ा, डॉ. मथरादास चलाना, संदीप चौधरी, रविंद्र बिंदू, पार्षद विनोद बांसल, सुरेंद्र कालड़ा, सुरिंद्र पाल रिटायर्ड जेई, वीरेश कुमार, शमशेर सिंह, पालविंद्र शास्त्री, इकबाल शांत, डॉ. एमके भादू, हरीश सेठी, अंग्रेज सिंह सग्गू, रजनीश मेहता, आशु सिंगला, रमेश कुमार, संजय मिढा, कुलदीप गदराना, श्याम मेहता, केशव शर्मा, राजीव वढेरा आदि शहरवासियों ने शामिल होकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
नेताओं को नहीं दिया बोलने का मौका
इस बार डबवाली अग्निकांड की बरसी पर राजनीतिज्ञों को अपनी रोटियां नहीं सेंकने दी गईं। सर्वधर्म प्रार्थना सभा में माइक के जरिए धार्मिक प्रवचन ही हुए। 23 दिसंबर 1995 को बिछुड़ी आत्माओं की शांति के लिए पुष्पांजलि के जरिए श्रद्धांजलि दी गई। अब तक राजनीतिक दलों के नेता बरसी के मौके पर ही अग्निकांड पीड़ितों के बीच पहुंचते थे। पीड़ितों की भावनाएं कुरेदते हुए एक-दूसरे पर कीचड़ उछालकर चलते बनते थे। करीब 22 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा पर पीड़ितों ने ब्रेक लगा दिए।
ये हुआ था
बता दें कि वर्ष 1995 में चौटाला रोड स्थित राजीव पैलेस में डीएवी स्कूल का सातवां वार्षिकोत्सव था, जिसमें करीब 1500 दर्शक मौजूद रहे। बढ़ती संख्या को रोकने के लिए मेन गेट पर भी ताला जड़ दिया। दोपहर 11 बजे समारोह शुरू हुआ। दोपहर एक बजकर 47 मिनट मेन गेट के पास अचानक आग भड़क गई और पांच मिनट में पूरा पंडाल दहकती लाशों में बदल गया था। हादसे में 388 लोग मौके पर जलकर मौत के आगोश में समा गए, जबकि 54 लोगों ने बाद में दम तोड़ दिया था।
ये हैं अग्निकांड पीड़ितों की मांगेें
23 दिसंबर को अग्नि सुरक्षा दिवस घोषित करें।
डबवाली में अग्नि पीड़ितों की याद में बने स्मारक को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करें।
इलाजरत मरीजों के लिए डबवाली के अस्पताल में अल्ट्रा माडर्न बर्न यूनिट बने।
प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप डबवाली में मेडिकल कॉलेज स्थापित हो।
जरूरतानुसार पीड़ितों के परिवारों को सरकारी नौकरी व यथोचित सहयोग देकर सरकार अपना दायित्व पूरा करें।