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मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही ठंड की चपेट में आने लगे बच्चे

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सिरसा।
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ज्यों-ज्यों ठंड बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखा जा सकता है। प्रतिदिन 100 से ज्यादा मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इस समय अस्पतालों में अभिभावक अपने बच्चों के इलाज के लिए ला रहे हैं। इनमें से अधिकतर बच्चे बुखार, जुकाम और खांसी से पीड़ित हैं। बदलते मौसम के कारण खांसी, जुकाम के साथ-साथ वायरल इंफेक्शन की शिकायतें भी बढ़ जाती हैं।
दिन में कभी गर्मी का एहसास तो शाम को सर्द मौसम से रूबरू होना पड़ रहा है। इस कारण बच्चों में सर्दी, जुकाम, नेजल एलर्जी, वायरल बुखार, गले की खराबी और स्किन की एलर्जी के रोग भी पनपने लगे हैं। डॉक्टरों की माने तो सर्दियां और गर्मियां शुरू होने के बीच के मौसम में बचाव करना बेहद जरूरी है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से बदलते मौसम का असर सबसे ज्यादा इन्हीं पर देखने का मिलता है। बच्चों में सर्दी-जुकाम के साथ निमोनिया के लक्षण भी सामने आते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बदलते मौसम का असर अभी एक माह और रह सकता है। ऐसे में इस दौरान सर्दी से बचाव रखने के साथ-साथ गर्मी का असर भी सेहत पर गंभीर कुप्रभाव डाल सकता है। सर्द-गर्म की वजह से बच्चों में वायरल फीवर का खतरा सबसे अधिक रहता है। मौसम के असर को शरीर पर रोकने के लिए बचाव बेहद जरूरी है। ऐसे में आने वाले एक महीने तक वायरल इंफेक्शन से बचने के लिए बच्चों के खान पान का विशेष ध्यान रखें। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की में प्रतिदिन काफी संख्या में बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि निजी चिकित्सकों के यहां बच्चों की भीड़ लगी रहती है।
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हर रोज आ रहे हैं 100 से ज्यादा रोगी
जिलेभर के अस्पतालों में रोजाना करीब 100 रोगी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जाएगी। सरकारी अस्पताल में ठंड से जुड़े रोगों से ग्रस्त लोगों के उपचार हेतु मेडिकल वार्ड में सारी सुविधा की गई है। सर्दी से ज्यादातर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे समय में थोड़ी सी सावधानी बीमार होने से बचा सकती है। नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जीएस सोमानी का कहना है कि ठंडे मौसम में शरीर की गर्मी मेनटेन करने के लिए ऊर्जा की ज्यादा जरूरत पड़ती है। ऐसे समय में शरीर में विटामिन सी और बी-कॉप्लेक्स का स्तर भी क ाफी कम हो जाता है, जिस कारण सर्दी, खांसी, बुखार, माथा दर्द आदि की समस्या तेजी से बढ़ती है। डॉक्टर सुभाषिणी का कहना है कि ऐसी स्थिति से शरीर में इंम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए लोगों को कागजी नींबू, संतरा, मौसमी, आंवला और ऐसे फल जिसमें खट्टापन ज्यादा होता है, उसका ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। इसके अलावा आवास पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। लोगों को अब एसी का प्रयोग बंद करना चाहिए। ठंडे मौसम में पहनावा पर विशेष ध्यान दें और ज्यादा से ज्यादा शरीर ढका रहे ऐसे वस्त्र पहने।

लगातार नीचे गिर आ रहा है तापमान
दिन अधिकतम न्यूनतम
25 नवंबर 28.1 11.2
26 नवंबर 28.8 10.2
27 नवंबर 28.2 10.1
28 नवंबर 28.2 10.1
29 नवंबर 28.1 10.0
30 नवंबर 28.8 10.2
01 दिसंबर 28.4 9.2
02 दिसंबर 27.1 9.1

ये बरतें सावधानियां
बच्चों को धूल-मिट्टी से दूर रखना चाहिए।
सर्दी से बच्चे को बचाकर रखना चाहिए।
ज्यादा ठंडी चीजें खाने को नहीं देनी चाहिए।
बच्चे को उबला हुआ पानी पिलाया जाए।
बीमारी का आभास होने पर तुरंत विशेषज्ञ से उपचार करवाएं।

दिनचर्या बदलें बुजुर्ग
इस मौसम में बुजुर्ग रोगी को विशेष रूप से संयमित रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही परेशानी में डाल सकती है। खासकर हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, दमा और श्वास, स्किन डिसीज से पीड़त रोगियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। अभी के मौसम में मार्निंग वॉक धूप निकलने के बाद ही करना चाहिए। बुजुर्ग को अल सुबह मार्निंग वॉक पर नहीं जाना चाहिए। बुजुर्ग अपनी दिनचर्या में सुधार लाकर और डॉक्टर से समय-समय पर अपना हेल्थ चेकअप कराकर सर्द मौसम में बीमारी से बच सकते हैं।
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इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है
ठंड बढ़ने से भले ही इंफेक्शन से जुड़ी बीमारी का खतरा बढ़ जाता हो, लेकिन डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी से लोगों को राहत मिल जाती है। ठंड में डेंगू मच्छर कर प्रजनन रुक जाता है। यही कारण है कि ठंड के बढ़ने के साथ ही डेंगू का प्रकोप घटता जाता है। थोड़ी सी सावधानी से सर्दी के कारण होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। तापमान में कमी आने के बाद कॉमन कोल्ड यानि सर्दी जुकाम बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। उन्होेंने बताया कि इस प्रकार के मरीजों की वजह से पिछले तीन चार दिनों में 10 से 15 प्रतिशत तक ओपीडी में मरीज बढे़ हैं।
-डॉ. विरेश, डिप्टी सीएमओ।
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