कश्मीर से कन्या कुमारी तक किसान अधिकार यात्रा 26 से
अमर उजाला ब्यूरो
डबवाली। केंद्र सरकार ने मनमाने तरीके से फसलों के जो समर्थन मूल्य तय किए हैं। वह किसानों को मंजूर नहीं हैं। किसान पिछले 10 सालों से डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसलिए सरकार अगर वास्तव में किसानों के लिए कुछ करना चाहती है तो उन सिफारिशों के मुताबिक सभी फसलों के मूल्य तय करे। ये विचार राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रदेशाध्यक्ष जसवीर सिंह भाटी ने दिल्ली में हुई किसान महासंघ की बैठक में भाग लेने बाद डबवाली लौटकर कही।
उन्होंने बताया कि बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि केंद्र सरकार ने किसान प्रतिनिधियों से बातचीत तक नहीं की और कपास, धान व अन्य फसलों के समर्थन मूल्य नाममात्र बढ़ाकर घोषित कर दिए। जो बढ़ोतरी सरकार ने की है, वह नाकाफी है। डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को दरकिनार किया गया है। ऐसे में किसानों को यह सब मंजूर नहीं है। भाजपा सरकार ने चुनावों से पहले वर्ष 2014 में जारी घोषणा पत्र में किसानों से वायदा किया था कि डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाएगा, लेकिन अब सरकार वादे से मुकर गई है। बैठक में निर्णय हुआ कि इसके विरोध में किसान महासंघ के बैनर तले जम्मू-कश्मीर से कन्या कुमारी तक किसान अधिकार यात्रा शुरू की जाएगी। इसके तहत सभी राज्यों में पहुंचकर किसान सभाएं की जाएंगी। सभाओं का दौर 26 जुलाई से शुरू होगा। हरियाणा में 31 जुलाई को नरवाना में विशाल सभा होगी। जिसमें प्रदेश भर से किसान भाग लेंगे और केंद्र सरकार के मनमाने रवैये के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। इस अवसर पर लीलाधर बलिहारा, देवेंद्र भोभिया, सुरेश ढाका, संदीप शेरपुरा, सोनू भाटी, बलराम खारीसुरेरां, प्रकाश ममेरां, राजाराम रिसालिया, रामस्वरूप गोरीवाला, मलकीत मान, साधु सिंह नीलेयांवाली, जगसीर सिंह जंडवाला, ओमप्रकाश नंबरदार, जयदयाल नंबरदार, शिवचरण, लाभ सिंह, वेद पाल डांगी, कालू नंबरदार फुल्लो साथ थे।