अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ को लेकर सिरसा में सिख संगत विरोध में उतर आई है। फिल्म को रिलीज न किए जाने की मांग को लेकर वीरवार को दसवीं पातशाही गुरुद्वारा के समक्ष सिखों ने विरोध-प्रदर्शन किया। बाद में डीसी को संबोधित ज्ञापन एडीसी को सौंपा। उधर, कालांवाली में भी सिख संगत ने विरोध करते हुए तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
सिरसा के दसवीं पातशाही गुरुद्वारा में एकत्रित सिख संगतों का नेतृत्व कर रहे श्रीगुरुग्रंथ साहिब सत्कार सभा के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह खालसा ने बताया कि फिल्म को लेकर सिखों में रोष है। फिल्म के निर्माता हरिंद्र सिक्का के खिलाफ भी लोगों में रोष है। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जा रहा है। अगर इस फिल्म पर रोक नहीं लगाई गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। सिखों को मजबूरन आंदोलन तेज करना पड़ेगा। सिख परंपराओं व गुरुबाणी से छेड़छाड़ के आरोपों के चलते पंजाबी फिल्म नानक शाह फकीर पिछले काफी समय से रिलीज के लिए लटक रही थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल को फिल्म को रिलीज करने के आदेश दिए, लेकिन सिख समुदाय के लोगों का रोष अभी भी बना हुआ है। इसी को लेकर सिरसा के गुरुद्वारा पातशाही दसवीं में सिख श्रद्धालु इकट्ठा हुए और फिल्म को बैन किए जाने की मांग की। हालांकि फिल्म निर्माता फिल्म को अभी पंजाब में रिलीज नहीं कर रहे।
प्रदर्शनकारी सिख श्रद्धालुओं का कहना है कि इस फिल्म में पहली पातशाही श्रीगुरु नानक जी को दिखाया गया है, वहीं उनके साथ जो चरित्र थे जैसे बीबी नानकी, तृप्ता, बाला और मरदाना जैसों को मानव रूप में दिखाया गया है, जो की सिख धर्म के बिलकुल खिलाफ है। वहीं एक सीन में रोटी से खून निकलने जैसे चमत्कार दिखाना भी सिखी धर्म में नहीं, इसके साथ ही गुरुबाणी के साथ भी फिल्म में छेड़छाड़ की गई है, क्योंकि फिल्म में गुरुबाणी से जाप को भी हटाया गया है। सिखों का कहना है कि ये फिल्म सिख धर्म के अनुरूप नहीं है, इसलिए इस फिल्म को रिलीज न किया जाए और यदि रिलीज किया गया तो सिखों द्वारा विरोध किया जाएगा, जिसकी जिम्मेवारी सरकार की होगी। उन्होंने पुरजोर मांग उठाई की फिल्म की रिलीज को लेकर जारी किया गया आदेश रद्द किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नानक शाह फकीर फिल्म सीधे रूप में गुरुबाणी की अवमानना है और सिख पंथ के संस्थापक गुरु और अन्य महापुरुषों का अनादर किया गया है। फिल्म के पात्रों, घटनाक्रम और काल्पनिक कहानी और दर्शाए गए स्थानों को लेकर भी सिखों ने अपना कड़ा ऐतराज जताया।
फिल्म पर प्रतिबंध लगाने को लेकर सिख समाज ने सौंपा ज्ञापन
उधर कालांवाली में रिलीज होने वाली फिल्म नानकशाह फकीर पर प्रतिबंध लगाने को लेकर बुधवार को सिख समाज के लोग हलोपा नेता निर्मल सिंह मलड़ी के नेतृत्व में तहसील कार्यालय में एकत्रित हुए। इस दौरान उन्होंने तहसीलदार छोटू राम भाखर को सीएम हरियाणा के नाम ज्ञापन पत्र सौंपकर फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। हलोपा नेता निर्मल सिंह मलड़ी, पार्षद संदीप वर्मा, कृष्ण जिंदल, संतोख सिंह, मास्टर परमानंद, अजय कुमार, मनदीप सिंह, लक्ष्मण सिंह, जगतार सिंह, निम्मा कालांवाली, मनी कालांवाली, बूटा सिंह ने बताया कि रिलीज होने जा रही फिल्म नानक शाह फकीर के ट्रेलर देखने से प्रतीत होता है कि इस फिल्म में गुरूनानक देव के जीवन काल में घटित घटनाओं एवं उनकी परंपराओं को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है, जिससे सिख समाज एवं सिख संगत को आहत पहुंची है। इस फिल्म को बनाने वाले ने गुरमत की परंपरा से हटकर मन्नत एवं कल्पना की परंपरा पर जोर दिया गया हैै। जिसका गुरूनानक देव ने अपने जीवनकाल में हमेशा ही विरोध करते हुए श्री गुरूग्रंथ साहिब में लिखित प्रवचनों को अवलोकन करके सच्चाई एवं ईमानदारी के रास्ते पर चलने का आह्वान किया था। उन्होंने सरकार से चेतावनी देते हुए मांग की है कि उपरोक्त फिल्म को चलने से रोका जाए अन्यथा फिल्म ना रोकने पर दंगे फसाद शुरू होने का खतरा है।