अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने कहा कि सरबजीत की मौत कैसे हुई, उनके हत्यारे कौन हैं, हत्याराें का क्या हुआ? जैसे सवालों का जवाब आज तक उन्हें नहीं दिया गया है। सर्जिकल स्ट्राइक मोदी सरकार का तमाशा था और इस तमाशे को अब जनता जान चुकी है। 56 इंच के सीने की बात करने वाले कश्मीर में पत्थरबाजों पर तो शिकंजा कस नहीं पा रहे हैं। ऐसे में ऐसी सरकार से क्या उम्मीद की जा सकती है। वे मंगलवार को मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत कर रही थी। पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में पिछले कई वर्षों से सजा काट रहे 300 से अधिक कैदियों की रिहाई की आवाज दलबीर कौर सामाजिक संस्थाओं के संग मिलकर अंतरराष्ट्रीय अदालत में बुलंद कर रही है। करीब दो बरस पहले दलबीर कौर ने लाहौर हाईकोर्ट से भारतीय कैदियों की सूची लेकर उसे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को सौंपा था। आज तक विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में अब इस गंभीर मसले को दलबीर कौर ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले जाने का निर्णय किया है। दलबीर कौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाए। उन्होंने कुछ कैदियों के उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब का नानक सिंह 1984 में अपने पिता के साथ खेताें में गया और गलती से बॉर्डर के जरिए पाक सीमा में प्रवेश कर गया। आज नानक सिंह युवा अवस्था में है और उसके इंतजार में उनके परिजनों की आंखें पथरा गईं हैं। इसी तरह से मोदी के अपने राज्य गुजरात के अहमदाबाद का कुलदीप पाक जेल में कई वर्षों से बंद है और वह टीबी रोग से पीड़ित है। ऐसे ही 300 कैदियों को लेकर उन्होंने अनेक बार मोदी को भी खत मिले, पर कोई जवाब नहीं आया।
मीडिया पर्सन ने किया सम्मानित
वहीं मीडिया सेंटर में पहुंचने पर सिरसा के मीडिया कर्मियों ने दलबीर कौर को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। साथ ही मीडिया कर्मियों ने उन्हें भारतीय कैदियों की रिहाई के लिए जारी उनकी मुहिम में हर तरह का सहयोग देने का आश्वासन दिया। इस दौरान राजेंद्र ढाबां, नवदीप सेतिया, देवेंद्र टक्कर, प्रभुदयाल, प्रदीप सचदेवा, पंकज धींगड़ा, महेश शर्मा, सतनाम सिंह, नकुल जसूजा, हैप्पी सिंह, राजेंद्र संधू, विजय जसूजा, एडवोकेट सुरेंद्र सरदाना मौजूद थे। वहीं, हरियाणा पंजाबी सभ्याचार मंच की ओर से देवेंद्र टक्कर ने भी उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।