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20 नए डॉक्टरों ने की ज्वाइनिंग, 13 को रास नहीं आई सरकारी नौकरी

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20 नए डॉक्टरों ने की ज्वाइनिंग, 13 को रास नहीं आई सरकारी नौकरी
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चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने की जगी उम्मीद
डॉक्टरों की कमी के चलते निराश होकर वापस लौट जाते हैं मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
सिविल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा को सुधारने के लिए सरकार ने डॉक्टरों की भर्ती तो कर दी, लेकिन लाख कोशिश के बाद भी डॉक्टर सरकारी सेवा की ओर आकर्षित नहीं हो रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सिरसा सिविल अस्पताल में नौकरी ज्वाइन करने के बाद 33 डॉक्टरों में से केवल 20 ही अस्पताल लौटे हैं। अन्य डॉक्टरों को सरकारी अस्पताल की नौकरी रास नहीं आई।
प्रदेश सरकार ने नए डॉक्टरों की ज्वाइनिंग अवधि की सीमा चार दिसंबर तक रखी थी। सिविल अस्पताल के सात डॉक्टर नौकरी से पहले ही इस्तीफा देकर जा चुके हैं। चिकित्सकों की कमी इसका खामियाजा जिले की जनता को भुगतना पड़ा रहा है। आलम ये है कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। जिलेभर से उपचार के लिए आने वाले लोगों को लाइनों में लगना पड़ता है, क्योंकि उनका उपचार करने के लिए डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है। अस्पताल में हर रोज ज्यादातर लोग सामान्य बीमारियों से ग्रस्त होकर आते हैं। ऐसे में वर्तमान में जिला अस्पताल में केवल एक फिजीशियन हैं और वो खुद सिविल सर्जन गोबिंद गुप्ता ही हैं। पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का ध्यान और उन्हेें अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी सिविल सर्जन पर होती है। ऐसे में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि सिविल सर्जन विभाग का कामकाज देखें या मरीजों का उपचार करें।
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कान, नाक और गले का स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी अस्पताल में नहीं। ऐसे में बड़ी उम्मीद से बेहतर और नि:शुल्क उपचार के लिए सरकारी अस्पताल में आने वाले लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। अब 20 नए डॉक्टरों की ज्वाइनिंग के बाद उम्मीद है कि इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।

पीएचसी के डॉक्टर इमरजेंसी में कर रहे हैं ड्यूटी
चिकित्सकों की कमी होने के कारण पीएचसी में कार्यरत डॉक्टरों से सिविल अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर की सेवाएं ली जा रही हैं। इमरजेंसी वार्ड के लिए 11 ईएमओ की नियुक्ति हुई थी, लेकिन इनमें से कोई भी डॉक्टर सेवाएं देने नहीं आ रहा। इमरजेंसी वार्ड में एक भी महिला ईएमओ की तैनाती नहीं है, जबकि चार महिला ईएमओ की नियुक्ति सरकार कर चुकी है। कई बार बड़ी इमरजेंसी आने पर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को इमरजेंसी ड्यूटी करनी पड़ती है। पीएचसी के डॉक्टरों की सेवाएं सिविल अस्पताल में लिए जाने के कारण कस्बों में रहने वाले लोगों को मजबूर सिविल अस्पताल में आना पड़ता है।

वेतन कम टेंशन ज्यादा
सिविल अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों की मानें तो सरकारी सेवा में आज भी काम का टेंशन अधिक है। संसाधन और दवाइयों की कमी से सेवा प्रभावित होती है। इसका विपरीत प्रभाव डॉक्टर पर भी पड़ता है। कम वेतन, निजी प्रैक्टिस पर रोक और दवा लिखने की आजादी न होना भी सरकारी सेवा से मोहभंग का कारण है।
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20 डॉक्टरों ने की ज्वाइनिंग
नवनियुक्त 33 डॉक्टरों में से 20 डॉक्टरों ने नौकरी ज्वाइनिंग कर ली है। सिविल अस्पताल में कुल 143 पद हैं, इनमें से 64 डॉक्टर सेवारत हैं। इन डॉक्टरों में से सात त्याग पत्र दे चुके हैं, नए डॉक्टरों में से 13 अभी भी गैर हाजिर हैं। नए डॉक्टरों की ज्वाइनिंग से स्वास्थ्य सेवाएं ओर अधिक बेहतर होंगी।
-डॉ. राजेश चौधरी, डिप्टी सीएमओ, सिरसा।
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