संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नगर परिषद प्रशासन ने वार्षिक बजट पास करवाने के लिए डिविजनल कमिश्नर के पास भेज दिया है। इस बार सालाना बजट में 27 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। ऐसे में अगर इस बार सरकार की ओर से ग्रांट नहीं मिली तो शहर के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
पिछली वर्ष नगर परिषद का सालाना बजट 125 करोड़ रखा गया था। इस बार अधिकारियों ने आय और खर्च में तालमेल बैठाते हुए बजट को 100 करोड़ से नीचे रखा है। इस बार 98 करोड़ का अनुमानित बजट पास होने के लिए भेजा गया है।
इस बजट से शहर विकास के हिस्से में 20 से 25 करोड़ रुपये ही आएंगे। विकास कार्यों के पैसे के लिए सरकार पर निर्भर रहना होगा। लंबे समय से आय के स्रोत नगर परिषद की ओर से विकसित नहीं किए गए हैं। हाउस नहीं होने का नुकसान भी पिछले साढ़े तीन साल से हुआ है। दुकानों की बोली करवाने, नई दुकानों व अन्य चीजों के निर्माण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाए हैं।
बॉक्स
नगर परिषद की आमदनी
स्टॉप ड्यूटी : 7 करोड़ रुपये
दुकानों का किराया : सवा करोड़ रुपये ।
एम टैक्स : पांच से 6 करोड़ रुपये
सैलरी के लिए : सरकारी ग्रांट (25 से 30 करोड़)
विकास शुल्क - 6 करोड़
टैक्स - साढ़े पांच करोड़
नोट : सभी राशि अनुमानित है।
अनुमानित खर्च
76 पार्कों की देखरेख : 90 लाख रुपये
बिजली खर्च : एम टैक्स की आय
गोशाला के लिए : 25 लाख रुपये
सफाई एजेंसी : 10 से 12 करोड़ रुपये सालाना
इसके अतिरिक्त : नसबंदी, पशु पकड़वाने पर भी पैसा खर्च होता है।
नगर परिषद की सालाना कमाई : 25 करोड़ रुपये
सालाना खर्च : 20 करोड़
विभागीय खर्च : 5 करोड़
एम टैक्स से निकालता है सिर्फ बिजली खर्च
नगर परिषद के बजट के अनुसार एम टैक्स (म्युनसिपल टैक्स) से मुख्य रूप से बिजली खर्च ही निकलता है। शहर में सभी बिजली के पोल पर स्ट्रीट लाइट के साथ तिरंगा लाइट लगी है। इसके अलावा पार्कों में रंगीन लाइट व लाइटिंग पोल लगे हुए हैं। चौक चौराहों में भी रंगीन लाइटें लगी हुई हैं। इसके अलावा कार्यालयों, पंप हाउस आदि पर भी बिजली खर्च होता है। ऐसे में एम -टैक्स का लगभग पैसा बिजली बिल में खर्च हो जाता है।
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हाउस बनने के बाद आय बढ़ाने पर होगा फोकस
अब नया हाउस बनने के बाद नगर परिषद की जमीन से इनकम की दिशा में कार्य किया जाएगा। मार्केट बनाकर किराये पर देने से लेकर पुरानी दुकानों की जगह को सेल करने पर फोकस किया जाएगा। पेट्रोल पंप, विज्ञापन पॉलिसी के तहत सही तरह से बस क्यू और यूनीपोल किराए पर देने से 4 से 5 करोड़ रुपये सालाना आय होगी। इसके अतिरिक्त भी विकल्प नगर परिषद को तलाशने होंगे। यदि सरकार ने सैलरी का पैसा जारी करने से हाथ खींच लिए तो कर्मचारियों की सैलरी बड़ी समस्या विभाग के पास हो जाएगी।
कोट्स
हमारी ओर अनुमानित बजट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। करीबन 98 करोड़ का बजट बनाया गया है। - देवेंद्र सैनी, अकाउंट ऑफिसर, नगर परिषद।