अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
फसलों के सरकारी खरीद समर्थन मूल्य और बकाया बीमा क्लेम राशि का शीघ्र भुगतान की मांग को लेकर जिले के किसान एक बार फिर लामबंद हो गए हैं। सोमवार को सैकड़ों किसानों ने लघु सचिवालय में प्रदर्शन कर धरना दिया। 156 गांव का 150 करोड़ रुपये बकाया है जिसको लेकर किसान पिछले एक साल से संघर्ष कर रहे हैं।
किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेतृत्व में किसानों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए उपायुक्त कार्यालय के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। किसानों को संबोधित करते हुए समिति के संयोजक विकल पचार ने कहा कि शासक वर्गों की किसान विरोधी नीतियों की वजह से खेती किसानी चौपट होती जा रही है। किसान कर्ज के मक्कड़जाल में फंसकर आत्महत्या कर रहे हैं। केंद्र और प्रदेश सरकारों ने किसानों को हमेशा से ही वोट बैंक रूप के इस्तेमाल करते हुए उनका राजनैतिक और आर्थिक शोषण किया है। किसान नेताओं ने केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा ने चुनाव पूर्व किसानों से अनेक लुभाने वाले वादे किए, लेकिन सत्ता मिलने के उपरांत सभी वादों से मुकर गई। किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेताओं ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन ने किसानों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया तो किसान संघर्ष समिति भविष्य में बड़े आंदोलन का आह्वान करेगी। दोपहर को किसानों उपायुक्त प्रभजोत सिंह को अपना मांग पत्र सौंपा। इस मौके पर किसान नेता राज कुमार शेखुपुरिया, जगरूप सिंह चौबर्जा, ओपी सुथार, गुरदास लकड़ावाली, मंजीत सिंह ओढां, जसवीर सिंह भाटी, कृष्ण ढाका, जगदीश रूपावास, प्रकाश ममेरा सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।
ये मांग कर रहे हैं किसान
मांगपत्र में मांग की गई कि सरसों, जौ और चना की सरकारी खरीद समर्थन मूल्य पर तमाम मंडियों में सुनिश्चित की जाए, 2017 की नरमा-कपास और धान फसलों की बकाया बीमा क्लेम राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए, दूध का न्यूनतम खरीद मूल्य तीन से पांच फैट तक 35 रुपये और इससे ऊपर सात रुपये प्रति फैट पशुपालकों को दिया जाए और भाखड़ा और फल्डी की सभी नहरों और माइनरों के आखिरी छोर तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
इन संगठनों ने दिया समर्थन
किसानों की मांगों को विभिन्न किसान संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। समर्थन देने वालों में अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति किसान यूनियन, अखिल भारतीय किसान सभा, हरियाणा किसान सभा, किसान मजदूर मोर्चा, किसान सैल हरियाणा और राष्ट्रीय किसान संगठन शामिल हैं।