अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
शहर के कई सरकारी स्कूलों में खामियों की भरमार है, जिसके चलते स्टाफ और बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ती है। बच्चों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वैसी पर्याप्त सुविधाएं उन्हें नहीं मिल रही। वीरवार को शहर के सरकारी स्कूलों का जायजा लिया गया तो स्कूलों में कई खामियां देखने को मिली। ऐसा लगा सरकारी स्कू लों में बच्चे रामभरोसे हैं।
हिसार रोड स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खैरपुर में हालात कु छ ऐसे हैं कि वहां पर न तो पर्याप्त संख्या में कमरे हैं और न ही बच्चों के लिए खेल का मैदान हैं। स्कूल में पीने के पानी की व्यवस्था भी ठीक नहीं। स्कूल के रास्ते भी कच्चे हैं। अध्यापकों ने कहा कि स्कूल में जगह की कमी है। खेल के मैदान नहीं हैं। स्कूल में पांच से छह कमरों की कमी है। स्कूल में कुल 566 बच्चे हैं। बच्चों की संख्या के आधार पर वहां सुविधाओं की बहुत कमी है। स्कूल में चौकीदार भी नहीं, जिसके चलते रात को स्कूल में चोरी होने का खतरा बना रहता है। स्कूल में ट्यूबवेल की भी मांग अध्यापक कर रहे हैं, जिससे कि पानी की आपूर्ति सही ढंग से हो सके।
वहीं, शहर के राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में तो आलम ऐसा है कि साफ-सफाई सही तरीके से न होने के कारण यहां कूड़ा फैला रहता है। स्कूल में सफाई कर्मी नहीं होने के कारण सफाई नहीं हो पाती। स्कूल में 2572 छात्र और छात्राएं पढ़ने के लिए आती हैं। इस स्कूल को जिले के मुख्य स्कूलों में गिना जाता है, लेकिन सुविधाओं के नाम यहां ज्यादा कुछ नहीं। स्कूल में न तो शौचालय का बेहतर प्रबंध हैं और न ही पीने के पानी का। स्कूल में कई ऐसे प्याऊ भी हैं जो कि पिछले बहुत समय से बंद पड़े हैं। स्कूल में न तो चपरासी हैं और न ही माली हैं। आवश्यकता के आधार पर स्कूल में सात कमरों की भी कमी है, जिससे कि स्कूल के स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिकतर कमरों की खिड़कियां टूटी हुई हैं। जहां से ठंडी हवा कमरे में आती है, जिससे विद्यार्थियों को परेशानी होती है।
उधर, राजकीय कन्या विद्यालय खन्ना कॉलोनी में न ही तो स्कूल के पास बच्चों के बैठने के कमरों का पूरा प्रबंध है और न ही मिड-डे मील के लिए किसी रसोई का प्रबंध है। स्कूल परिसर ऊबड़-खाबड़ है। स्कूल के पास केवल तीन ही कमरे हैं और उनमें से भी एक कमरा आंगनबाड़ी के पास है। उसमें आंगनबाड़ी का समान पड़ा है। स्कूल में वाटर कूलर भी किसी दानी सज्जन का दिया हुआ है। बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते हुए मिले। स्कूल की चारदिवारी की हालत भी ऐसी हो गई है कि देखकर लगता है जैसे अभी गिर जाएगी। स्कूल में पांच कक्षाएं हैं, जबकि कमरे मात्र दो ही हैं। अभी मिड-डे मील का सामान उन्हीं कमरों में पड़ा है, जिनमें बच्चों को बैठना चाहिए। जगह कम होने के कारण बच्चों के खेलने के लिए मैदान नहीं है। स्कूल मेें चौकीदार की भी कमी है। स्कूलों के निरीक्षण के दौरान खास बात यह रही कि स्कूल प्रबंधन का कोई पदाधिकारी खामियों के बारे में बातचीत करने को तैयार नहीं हुआ। सभी यही कहते रहे कि वे कुछ इस विषय पर कोई बात नहीं करेंगे।