अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
सिरसा जेल के हवालाती रामनाथ की मंगलवार रात को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। सोमवार को जेल में अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में दाखिल करवाया गया था। शव का पोस्टमार्टम बुधवार को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में किया गया। मृतक के परिजनों ने ओढां थाना पुलिस पर आरोप लगाए हैं और छह दिनों से जेल में बंद हवालाती रामनाथ ने जेल में ऐसा कौन सा नशीला या जहरीला पदार्थ खा लिया जिससे उसकी मौत हो गई। इसलिए डॉक्टरों ने शव का पोस्टमार्टम कर उसका विसरा जांच के लिए लैब में भेजा है। जांच रिपोर्ट के बाद साफ हो जाएगा कि किस कारण हवालाती की मौत हुई है।
ओढां के वार्ड आठ निवासी राम नाथ को मादक पदार्थ तस्करी करने के आरोप में ओढां थाना पुलिस ने 31 मई 2017 को गिरफ्तार किया था। अदालत ने उसे जेल भेज दिया। रामनाथ जेल की हवालाती बैरक में बंदी था। सोमवार को अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और वह उल्लिटयां करने लगा। जेल प्रशासन ने उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया, यहां उसकी हालत नाजुक होते देख डॉक्टरों ने उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भेज दिया। मंगलवार को उपचार के दौरान हवालाती रामनाथ की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर हुडा चौकी पुलिस अस्पताल पहुंची। मृतक के परिजनों ने मौत के कारणों पर सवाल खडे़ किए तो डॉक्टरों के बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम किया और शव का बिसरा जांच हेतु भेज दिया। मृतक के परिजनों का कहना है कि ओढ़ां थाना पुलिस ने रामनाथ पर तस्करी का झूठा केस दर्ज किया और उसे बेरहमी से पीटा भी था। इससे रामनाथ तनाव में रहने लगा और उसने जेल में किसी नशीले पदार्थ का अधिक सेवन कर लिया जिससे उसकी मौत हो गई। बुधवार को मजिस्ट्रेट की देखरेख में पोस्टमार्टम की सारी कार्रवाई की गई। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी हुई है।
कटघरे में जेल प्रशासन, सोमवार को ही हवालाती ने लगाई थी आग
सिरसा जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर पिछले तीन सालों से सवालिया निशान लग रहे हैं। मोबाइल से लेकर मादक पदार्थ और नशे की गोलियां यहां बरामद होती है। जेल वार्डन तक को मोबाइल व नशीली गोलियों के साथ रंगे हाथों पकड़ा जा चुका है। उप जेल अधीक्षक संजीव पातड़ ने पिछले वर्ष स्पेशल ऑपरेशन चलाकर जेल से कई मोबाइल फोन संगीन वारदातों को अंजाम दे चुके बदमाशों से बरामद किए। सोमवार को एक तरफ हवालाती प्रवीण कुमार ने खुद को आग लगाकर कर आत्मदाह का प्रयास किया और दूसरी तरफ हवालाती रामनाथ की अचानक हालत बिगड़ गई और वह उल्लिटयां करने लगा। हवालाती प्रवीण की जान बच गई, जबकि हवालाती रामनाथ की उपचार के दौरान मौत हो गई। इन दो घटनाओं से साफ होता है कि सिरसा जेल में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। जेल अधिकारियों पर बंदियों को प्रताड़ित करने का आरोप लग रहा है। जेल सूत्रों की मानें तो जेल विभाग या मानव अधिकार आयोग ने कभी भी जेल में हुई पिछली घटनाओं को लेकर गंभीरता से जांच नहीं की। अगर गंभीरता से सिरसा जेल में हर घटना क्रम की जांच की जाए तो सारी सच्चाई खुलकर सामने आ जाएगी।
मजिस्ट्रेट ने दर्ज किए परिजनों का बयान
मजिस्ट्रेट की निगरानी में पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। मृतक के भाई भगवान ने मजिस्ट्रेट को अपना बयान दिया है। डॉक्टरों के बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम कर पूरी कार्रवाई की वीडियो बनाई है। शव का विसरा जांच के लिए मधुबन लैब में भेजा जा जाएगा। इसकी रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि किसी पदार्थ के सेवन से हवालाती की हालत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हुई। मौत का कारण सामने आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, फिलहाल 176 के तहत मजिस्ट्रेट कार्रवाई की गई है।
-आत्माराम, इंचार्ज हुडा चौकी, सिरसा।
जांच करवाएंगे पूरे मामले की
एसए सुभाष और एएसआई महेंद्र दोनों ने मेरे भाई को पैसे न देने पर टॉर्चर किया था। ये बात रामनाथ ने अपनी पत्नी को न्यायिक हिरासत में जाने से पूर्व बताई थी, कि उक्त दोनों पुलिस कर्मचारियों ने मुझे काफी शारीरिक यातनाएं दीं। रामनाथ ने ये भी कहा था कि अगर हमारे पास 50 हजार रुपये होते तो शायद ये मुझे छोड़ देते। मेरी कर्मचारी सुभाष से रामनाथ के फोन पर बात हुई थी उसने व एएसआई महेंद्र ने मुझसे रामनाथ को छोड़ने की एवज में 50 हजार रुपये मांगे थे। जेल प्रशासन ने रामनाथ के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना ओढां पुलिस को दी थी, लेकिन ओढां पुलिस ने हमें इस बारे कोई सूचना नहीं दी। जब मेरे भाई की मौत हो गई थी तो हुडा पुलिस चौकी के पुलिस कर्मचारी ने हमें सूचना दी। इस मामले में एसए सुभाष व एएसआई महेंद्र के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो हम संघर्ष करेंगे तथा ओढां थाने में रोष प्रदर्शन भी करेंगे।
-भगवानदास, मृतक का भाई।
मुखबरी पर की थी कार्रवाई
इस मामले में आरोपी को खास मुखबरी के आधार पर कार्रवाई कर आरोपी को ढाई किलोग्राम चूरा पोस्त सहित काबू किया था। इसके अलावा मेरी न ही तो किसी से फोन पर बात हुई और न ही किसी से किसी तरह पैसे की डिमांड की। जो आरोप लगाए गए हैं वो बेबुनियाद है।
-सुभाष कुमार, एसआई।
छह दिन बाद हुई मौत, इसमें पुलिस क्या कसूर
देखिए पुलिस ने उसे एनडीपीएस मामले में पकड़ा था जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जहां छह दिन बाद उसकी मौत हुई है। पुलिस ने उसके साथ कोई ज्यादती नहीं की और न ही कोई डिमांड की गई। अगर उक्त लोग जांच करवाने की बात कह रहे हैं तो अधिकारी जांच कर लेंगे।
- बलवंत जस्सू, थाना प्रभारी ओढां।
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ओढां के व्यक्ति की न्यायिक हिरासत में मौत
परिजनों ने ओढां पुलिस को ठहराया जिम्मेवार
31 मई को पुलिस ने किया था गिरफ्तार, सोमवार को जेल में हालत बिगड़ी
मजिस्ट्रेट की निगरानी में डॉक्टरों के बोर्ड ने किया शव का पोस्टमार्टम, बिसरा जांच के लिए भेजा