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खेतीबाड़ी छोड़ 10 साल से पौधरोपण अभियान में जुटा सतपाल

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ओढां। अलसुबह उठते ही सर्वप्रथम दो किलोमीटर की सैर करना फिर गोशाला में गोसेवा करना। पौधों कि देखरेख कर उन्हें पानी देकर उनकी निराई गुड़ाई करना इसी कार्य को अपनी दिनचर्या बना लिया नुहियांवाली निवासी करीब 58 वर्षीय सतपाल बडजाती ने। पर्यावरण हितैषी सतपाल ने बताया कि वह एक साधन संपन्न किसान है। उसने करीब 7-8 वर्ष पूर्व अपने इकलौते पुत्र को खेती का कार्यभार सौंप दिया और खुद समाज सेवा में समय लगाने का मन बना लिया।
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सतपाल ने बताया कि उसकी दिनचर्या सुबह की सैर के साथ शुरू होती है। जिसके बाद वह इधर-उधर घूमने की बजाए पूरा दिन अपना समय समाज सेवा में ही बिताता है। सतपाल ने बताया कि गांव में स्थित गोशाला मेें कुछ घंटे गोसेवा में बिताने के बाद वह अपना समय सिर्फ पेड़ पौधे लगाने व उनकी देखरेख करने में ही बिताता है। अलसुबह इस शख्स को जलघर, गोशाला, जोहड़ व पार्क के इर्द-गिर्द पौधे लगाते या उनकी देखभाल करते देखा जा सकता है।

गोवंश के लिए छाया की समस्या थी, तभी मिली प्रेरणा
पौधरोपण की प्रेरणा बारे सतपाल ने बताया कि जब गांव में गोशाला का निर्माण हुआ तो उस समय वहां पर गोवंश के लिए छाया की बड़ी समस्या थी। जिसके चलते उसने ये निश्चय कर लिया कि वह पौधरोपण व उनकी देखरेख को अपनी दिनचर्या में शामिल करेगा। ताकि गोवंश के साथ-साथ आम लोगों को भी तपती गर्मी में छाया नसीब हो तथा पर्यावरण संरक्षण में उसका योगदान बना रहे। इसी धारणा को लिए सतपाल पिछले 10-11 वर्षों से इस कार्य में अपना योगदान देते हुए पेड़-पौधों की देख रेख कर रहा है। इस कार्य के लिए सतपाल को नुहियांवाली ग्राम सेवा मंच व ग्राम पंचायत की ओर से सम्मानित किया जा चुका है।
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मेरा ये मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने या अपने परिजनों के जन्म दिवस या फिर अन्य अवसरों पर पौधारोपण जरूर करना चाहिए।
- सतपाल बडजाती

पर्यावरण सरंक्षण में सतपाल का काफी अच्छा योगदान है। इससे हम सभी को प्रेरणा लेने की जरूरत है। सतपाल के इस समाजसेवी कार्य की हम मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं।
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- बाबू राम गेदर, सरपंच (नुहियांवाली)
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