अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में विभिन्न मांगों को लेकर एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन और आउटसोर्सिंग एंप्लाइज एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रशासनिक भवन के सामने चल रहे धरने पर शुक्रवार को पांचवें दिन भी दोनों कर्मचारी आमरण अनशन पर रहे। दोनों का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। श्रवण कुमार का वजन दो किलोग्राम कम हुआ। कर्मचारियों की हड़ताल को कक्षाओं का बहिष्कार करके छात्रों के समर्थन के साथ-साथ कई संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने धरना स्थल पर जाकर समर्थन दिया। हड़ताली कर्मचारियों व छात्रों ने कुलपति, रजिस्ट्रार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों की हड़ताल से कार्यालयों का कामकाज ठप होने के कारण विश्वविद्यालय में काम कराने के लिए आने परीक्षार्थी और छात्रों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
सीडीएलयू में धरने पर बैठे कर्मचारियों में से एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन एनटी के देवी लाल और आउटसोर्सिंग एंप्लाइज एसोसिएशन से श्रवण कुमार ने मांगें पूरी न होने के कारण सोमवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। शुक्रवार को पांचवें दिन भी उनका आमरण अनशन जारी रहा। इस दौरान दोनों अनशनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट जारी है, जिसमें श्रवण कुमार की हालत ज्यादा खराब हो रही है। सिर में दर्द के साथ-साथ वजन भी दो किलोग्राम कम हो गया है। विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक उनके स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं। शुक्रवार को विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया। इनसो से अमृतमान और कर्ण कंस्वा ने भी समर्थन दिया।
उधर, गोकुल सेतिया, शीशपाल केहरवाला व भूपेश मेहता ने भी धरना स्थल पर जाकर अनशनकारियों का हाल चाल जाना और कर्मचारियों का समर्थन किया। हड़ताल कर रहे यूनियन के प्रधान बजरंग ने बताया कि 18 जनवरी को उप कुलपति को कई मांगों को लेकर एक मांग पत्र सौंपा था जिस पर काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे वीसी के खिलाफ कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है। नॉन टीचिंग कर्मचारियों का वर्क लोड निर्धारित किया जाए सहित कई मांगों को लेकर वीसी से कई बार मिल चुके हैं, लेकिन किसी भी समस्या का हल नहीं हो पाया है। उप कुलपति के अड़ियल रवैये के कारण विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मी ने संघर्ष रत है।
बजरंग लाल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रजातंत्र का गला घोटने में लगा हुआ है। वह कर्मचारियों की मांगों की तरफ ध्यान न देकर राजनीति करने में लगा हुआ है। कुलपति कर्मचारियों की जायज मांगों को अनदेखा कर चापलूसों से घिरा हुआ है। कुलपति रोज-रोज तुगलकी फरमान जारी करते हैं, जिससे कर्मचारी ही नहीं छात्र भी पीड़ित हैं। बजरंग लाल ने कहा कि कुलपति और कुलसचिव दोनों ही विश्वविद्यालय को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। यूनियन के महासचिव कुलदीप गहलावत, सचिव सुरेंद्र दलाल, कैशियर रविंद्र सैनी, आउटसोर्सिंग यूनियन के उपप्रधान रणबीर, सचिव ज्योति व कैशियर सत्यवान कुंडू, पूर्व प्रधान महेंद्र बैनीवाल, जसकरण, देवेंद्र हुड्डा, सुंदर लाल, रेणू शर्मा, धर्मपाल, राकेश, महेश, धर्मवीर, भारत भूषण शर्मा, सुभाष बैनीवाल, राजेश छिकारा, गुलशन मेहता, किरण कपिल, प्रवीण, रमेश हंस, लीलू, अंकेश, शारदा, विजय रंगा, मनोज रेलन, सुरेंद्र हांडा, कृष्ण, , रवि, रामनिवास, देव, सविता, संध्या, ओमदा, अनिल भौरिया, अनिल धनखड़, संजीव सहित सैकड़ों कर्मचारी व छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ रोष स्वरूप प्रशासनिक भवन के सामने हड़ताल पर बैठ हुए हैं।