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मम्मड़ ब्रांच टूटने से किसानों की 50 ं एक ड़ फसल जलमग्न

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अमर उजाला ब्यूरो
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ओढां।
घुंकावाली-नुहियांवाली रकबा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली मम्मड़ ब्रांच टूटने से किसानों की करीब 50 एकड़ गेहूं व सरसों की फसल जलमग्न हो गई। सूचना पाकर विभाग के जेई ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी व मजदूरों की सहायता से टूटे हिस्से को पाटने का कार्य शुरू करवाया। करीब नौ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टूटे हिस्से पर काबू पाया गया। नहर टूटने से घुंकावाली के किसानों को ज्यादा नुकसान का सामना करना पड़ा है।
मम्मड़ ब्रांच में शनिवार सुबह एक लाख 19 हजार 800 बुर्जी पर घुंकावाली व बनवाला रकबा क्षेत्र में अचानक दरार आ गई। किसानों की सूचना पाकर विभाग के जेई लखविंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थित का जायजा लेते हुए जेसीबी व मजदूरों की सहायता से टूटे हिस्से को पाटने का कार्य शुरू करवाया। पानी का बहाव तेज होने के कारण कार्य मेें बाधा उत्पन्न हुई जिसके बाद नहर को गोलूवाला हैड से बंद करवाकर कार्य पुन: शुरू किया गया। खेतों में पानी भरने के कारण जेसीबी मशीन को बंद करवाकर मजदूरों से कार्य शुरू किया गया। नहर टूटने से बनवाला व घुंकावाली का रकबा प्रभावित हुआ है जिसमें घुंकावाली के किसानों की गेहूं व सरसों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। वहीं नहर टूटने से फसलों के अलावा कुछ टयूबवेल भी जलमग्न होने से किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा है। नहर में करीब 25 से 30 फुट तक दरार आई है।
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उम्मीदों पर फिरा पानी
नहर टूटने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। घुंकावाली के किसान गुरशरण सिंह, मेजर सिंह, जगसीर सिंह, हरनेक सिंह, सुखदेव सिंह, बग्गड़ सिंह आदि ने बताया कि नहर टूटने से उनकी 15 एकड़ फसल में एक से दो फुट पानी भर गया है। वहीं बनवाला के किसान ओमप्रकाश व पवन कुमार आदि ने बताया उनकी नहर के साथ-साथ लगती सात एकड़ गेहूं का नुकसान हुआ है। घुंकावाली के किसान गुरशरण सिंह व मेजर सिंह ने दु:खी मन से बताया कि उन्होंने इस बार ठेके पर भूमि लेकर काश्त की थी। उक्त किसानों की खरीफ की फसल बेहद कमजोर होने के कारण उन्हें रबी की फसल से उम्मीदें थी लेकिन नहर टूटने से उनकी उम्मीदों पर न केवल पानी फिर गया अपितु ट्यूबवेल भी पानी की भेंट चढ़ने से उन्हें बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। किसानों ने अपनी फसलों को बचाने के लिए सुबह से लेकर देर शाम तक जदोजहद जारी रखी। किसान अपने-अपने खेताें में पानी न घुसने देने के उद्देश्य से छोटे-छोटे बांध बनाकर रखवाली करते देखे गए। किसानों के अनुसार बरसात होने के बाद फसलों में ज्यादा पानी घुसने के चलते फसल बिल्कुल नष्ट हो जाएगी। किसानों ने प्रशासन से उनके नुकसान की भरपाई की मांग की है।
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वर्जन
सुबह 10 बजे नहर टूटी थी, लेकि न पानी का बहाव तेज होने के कारण बाधा उत्पन्न हुई। इसके बाद मुख्य हैड से पानी बंद करवाया गया। लेकिन पानी का बहाव कम होने में करीब 10 से 12 घंटे लगे। दो जेसीबी व करीब 30 मजदूर लगाए गए जिससे टूटे हिस्से पर काबू पा लिया गया है। चूहे के का बिल नहर टूटने का कारण हो सकता है।
--लखविंद्र सिंह, जेई (नहरी एवं सिंचाई विभाग)

मम्मड़ ब्रांच टूटी, 50 एक ड़ गेहूं और सरसों की फसल डूबी
नौ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद नहर के टूटे हिस्से को पाटा
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