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डेरा हिंसा के बाद बेपटरी हुआ डेरा

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सिरसा।
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साध्वी बलात्कार मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के जेल जाने के बाद से डेरा अब बेपटरी हो गया है। डेरा का संचालन करने वाले पदाधिकारियों ने डेरा से दूरी बना ली है या भूमिगत हो गए हैं। डेरा के खाते सीज होने पर डेरा अब पाई-पाई को तरस रहा है। बिलों का भुगतान न होने पर डेरा के छोटे बडे़ 61 उद्योगों के कनेक्शन काटे जा चुके हैं। तो दूसरी ओर डेरा के शिक्षण संस्थानों से बच्चे पलायन कर चुके हैं। शाह सतनाम अस्पताल में चंद डॉक्टर ही अस्पताल का संचालन कर रहे हैं।
सिरसा में 24 अगस्त तक खामोशी छाई हुई थी और डेरा सच्चा सौदा में कुछ चहल पहल थी पर डेरा प्रेमियों के मन में अदालत के फैसले को लेकर किंतु परंतु चल रहा था। 25 अगस्त को बलात्कार मामले में अदालत ने डेरा प्रमुख को 20 साल की सजा सुनाई तो उसके डेरा प्रेमियों ने हिंसा करके अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारने जैसा काम किया। लोगों की डेरा के प्रति थोड़ी बहुत सहानुभूति रही वह भी जाती रही। सरकार ने डेरा के बैंक खाते सीज कर डेरा की कमर ही तोड़कर रख दी। डेरा आज तक पैसे की कमी के चलते सिसकियां ले रहा है। आंसू पोंछने वाले गिरफ्तारी के डर से भूमिगत हो गए हैं और जो डेरा की आर्थिक तौर पर मदद करना चाहते हैं वे पुलिस के डर से कुछ नहीं कर पा रहे हैं। डेरा की सारी गतिविधियां बेपटरी हो चुकी हैं। कुछ लोग अब नया डेरा में जाकर सिमरण करने लगे हैं। पुराना डेरा श्रद्धालुओं के लिए पहले ही खोल दिया गया था।
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आज स्थिति यह है कि डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा हर उद्योग धंधा, कारखाना बंद है। सभी तक ताले लटक गए हैं। कुछ सेवादार उनकी चौकसी कर रहे हैं। मीडिया पर डेरा की आज भी पैनी नजर है। मीडिया का डेरा में प्रवेश पूरी से बंद है। अगर कोई किसी प्रकार चला गया तो उसे कैमरे और मोबाइल नहीं चलाने दिया जाता साथ ही उसे बाहर कर दिया जाता है। डेरा के चारों ओर डेरा के सेवादार तैनात हैं। जगह जगह पर पुलिसकर्मी भी हैं। डेरा जहां पर रौनक रहती थी आज वीरानी छाई हुई है।
स्कूलों से पलायन कर रहे है बच्चे
डेरा सच्चा सौदा के शिक्षण संस्थानों में पहले बच्चों का दाखिले करवाने के लिए मंत्रियों और विधायकों की सिफारिश तक लगवाई जाती थी पर आज डेरा के सभी स्कूलों पर संकट सा छाया हुआ है। शिक्षा विभाग की ओर से मिले आंकड़े के अनुसार डेरा के शाह सतनाम गर्ल्स स्कूल में 25 अगस्त से पहले 1802 लड़कियां थीं जिनकी संख्या अब घटकर 1661 रह गई है। शाह सतनाम जी लड़कों के स्कूल में 25 अगस्त तक 2198 छात्र थे जो अब 1908 रह गए हैं। सेंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल में 310 में से 288 बच्चे ही रह गए हैं। डेरा हिंसा के बाद अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर भयभीत हैं और काफी बच्चे शहर के दूसरे स्कूलों में दाखिले ले चुके हैं। बच्चों का पलायन आज भी जारी है। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. यज्ञदत्त वर्मा ने माना कि डेरा के स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी आई है।
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उद्योग धंधे हुए बंद
डेरा हिंसा के बाद डेरा परिसर में स्थित सभी छोटे बडे़ कारखाने बंद हो गए हैं। एमएसजी कंपनी पर ताला लगा हुआ है। कर्मचारी जा चुके हैं। कंपनी का सीईओ सीपी अरोड़ा जेल में हैं। बिजली के बिल बढ़ते जा रहे हैं ऐसे में बिजली निगम बकाया राशि को लेकर कनेक्शन काटने में लगा हुआ है। डेरा में स्थित 18 बड़े उद्योगों पर करीब 42 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है तो वहीं 21 छोटे उद्योगों पर भी ताले लटक गए हैं, जिन पर बिजली निगम का 10 लाख का बिल बकाया है। इसके अलावा गैर घरेलू उद्योग धंधों वाले 22 संस्थानों से नौ लाख का बिल बकाया है। चोपटा उपमंडल के एसडीओ रवि कुमार के अनुसार बकाया राशि को लेकर निगम ने इन सभी के कनेक्शन काट दिए हैं।
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