अमर उजाला ब्यूरो
ओढां।
लगता है कि स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों को महिला स्टाफ के हवाले कर दिया है। बडागुढ़ा में जहां सीएचसी केंद्र को स्टाफ नर्सें संभाल रही हैं तो कमोवेश यही स्थिति पन्नीवाला मोटा में भी देखी जा रही है। यहां भी लोगों के इलाज और प्रसव केस से लेकर फार्मासिस्ट तक की भूमिका भी स्टाफ नर्स को निभानी पड़ रही है। महिला चिकित्सक न होने पर भी यहां के प्रसव आंकड़ों ने जिले की सभी पीएचसी और सीएचसी को भी पीछे छोड़ दिया है। इसकी वजह यहां के स्टाफ नर्स का व्यवहार और उचित देखरेख है।
ओढां सीएचसी के अधीन पड़ने वालेे पन्नीवाला मोटा पीएचसी केंद्र में आनंदगढ़, पन्नीवाला मोटा, रोहिड़ांवाली, भागसर, साहुवाला प्रथम, नुहियांवाली, घुंकावाली, खुईयांनेपालपुर और कर्मगढ़ सहित नौ गांव आते हैं, जिनकी आबादी तकरीबन 29373 है। इसके अलावा गोरीवाला क्षेत्र के गांव बनवाला, रिसालियाखेड़ा, जंडवाला बिश्नोईयां, रत्ताखेड़ा और रामुपरा बिश्नोइयां सहित अन्य गांवों के लोग भी प्रसव केसों को प्राय: यहीं लेकर आते हैं। पीएचसी में हर माह औसतन 30 से 35 प्रसव होते हैं, जबकि एक जनवरी से नवंबर तक के आंकड़ों पर गौर फरमाई जाए तो अब तक यहां पर 364 प्रसव करवाए जा चुके हैं, जबकि सीएचसी ओढां में जनवरी से अक्तूबर तक 261 प्रसव केसों का आंकड़ा है। यानि स्टाफ न होने के बावजूद भी पीएचसी ने सीएचसी को मात दे रखी है।
एंबुलेंस भी नहीं, ग्रामीणों में रोष
ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि एक तरफ तो स्वास्थ्य विभाग आमजन क ो बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दम भर रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ अस्पतालों में स्टाफ तक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके गांव के अस्पताल को महिला स्टाफ ही चला रही हैं, जबकि इस बारे विभाग को कई बार अवगत करवाया जा चुका है लेकिन यहां चिकित्सक की नियुक्ति करना तो दूर फार्मासिस्ट को भी कालांवाली सीएचसी केंद्र में डेपुटेशन पर भेज रखा है। लोगों ने कहा कि पीएचसी में नौ गांव पड़ने एवं सबसे ज्यादा प्रसव केस होने के बावजूद भी विभाग ने यहां एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करवाई।
ये हैं स्वीकृत और खाली पोस्टें
पीएचसी में दो एमओ, चार स्टाफ नर्स, दो एनएम, एक एलएचवी, एक दंत चिकित्सक, एक मलेरिया सुपरवाईजर, एक वर्कर, एक एलटी, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, एक फार्मासिस्ट सहित 15 पोस्टें स्वीकृत हैं, जिनमें से दो एमओ, मलेरिया सुपरवाईजर और वर्कर, दंत चिकित्सक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, एलटी सहित छह पोस्टें खाली हैं। पीएचसी में एमओ की अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट जैसे-तैसे कार्य चला रहा था, लेकिन विभाग ने उसे कालांवाली में डेप्यूट कर दिया। पीएचसी में दो एमओ की जगह एक एमओ डॉ. विरेंद्र कुमार भी तैनात थे जो लंबी छुट्टी पर चल रहे हैं। इस समय पीएचसी की स्थिति ये है कि स्टाफ नर्सें ही जैसे-तैसे कर पीएचसी को चला रही हैं। दिन भर की करीब 150 की ओपीडी होती हैं।
नहीं हो रही सुनवाई
कहने को तो हमारे गांव में पीएचसी केंद्र हैं, लेकिन यहां पर स्टाफ तो पहले से ही कम था और ऊपर से फार्मासिस्ट को यहां से डेपुटेशन पर भेज दिया। पंचायत ने सिविल सर्जन को अवगत करवा रखा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। पीएचसी के अधीन नौ गांव पड़ते हैं, जिनकी आबादी करीब 30 हजार है। फिर भी यहां पर न तो कोई एंबुलेंस सुविधा है और न ही स्टाफ पूरा। रात और दिन के समय महिला स्टाफ की ड्यूटी होने के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सवाल है, लेकिन विभाग जानबूझकर अनजान बना हुआ है।
-सतवीर कस्वां, सरपंच पन्नीवाला मोटा।
स्टाफ की कमी है, हम क्या करें
स्टाफ की कमी लगभग हर जगह है। डॉ. विरेंद्र कुमार छुट्टी पर हैं जो कुछ ही दिनों में आ जाएंगे। स्टाफ की कमी बारे हर माह रिपोर्ट भेजी जाती है। नियुक्ति करना तो सरकार और उच्चाधिकारियों का काम है।
-डॉ. भूषण गर्ग, एसएमओ ओढां।