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विश्व की हर पर्वत की चोटी पर फ हराना है तिरंगा:अनीता कुंडू

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
हरियाणा की बेटी अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही अनीता कुंडू ने हाल ही में इंडोनेशिया के सुदिर्मन के कारस्टेंस पिरामी 4884 मीटर ऊंचे शिखर पर तिरंगा लहराया है। इसके अलावा वर्ष 2017 में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली अनीता का लक्ष्य विश्व की सबसे ऊंचे पर्वतों पर चढ़ार्ई करना है।
वे रविवार को सुरखाव पर्यटन केंद्र में अमर उजाला से बातचीत कर रही थी। उन्होंने बताया कि अर्जेटीना स्थित एकोनकागुआ की ऊंचाई 6961 मीटर, नॉर्थ अमेरिका की एलास्का रेंज की यूनाइटेड स्टेट स्थित मैककिनले की ऊंचाई 6194 मीटर, अफ्रीका की तंजानिया स्थित किलीमंजारो की ऊंचाई 5895 मीटर, यूरोप के कॉकेसस पर्वत शृंखला की रसिया स्थित माउंट एलब्रस की ऊंचाई 5642 मीटर, अंटार्कटिका की सेंटिनल पर्वत शृंखला की माउंट विंसन की ऊंचाई 4892 मीटर ऊंची चोटी को फतेह करना है। अपने सेवन समिट मिशन के तहत हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर अनीता ने एवरेस्ट के बाद दूसरी सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया। अनीता अब पांच महाद्वीपों की चोटियों को फतह करने निकलेंगी। राज्यसभा सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा ने उनके पैतृक गांव पाबड़ा में पर्वतारोही अनीता कुंडू के नाम पर मार्ग का लोकार्पण किया है।
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उन्होंने बताया कि उन्हें खुशी है कि उनके अपने गांव में उन्हें इतना बड़ा सम्मान दिया गया कि उनके नाम से सड़क का नाम रखा गया है। इससे सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को तो बल मिला ही है इसके अलावा युवाओं को भी एक अच्छा संदेश मिला है कि विपरीत परिस्थितियों में शॉर्ट कट न अपनाकर मेहनत और लग्न से काम करने से ही सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न- आपको पर्वतारोहण की प्रेरणा कहां से मिली?
उत्तर- मेरे लिए सबसे बड़ प्रेरणा स्रोत मेरे पिता जी रहे हैं। मेरे पिताजी जब मैं मात्र 13 साल की थी तब दुनिया को छोड़कर चले गए, लेकिन 12 वर्षों में उन्होंने हमें जो सिखाया वहीं मेरी प्रेरणा बन गई। उनकी प्रेरणा से ही मैं जीवन में आगे बढ़ती आ रही हूं और आज इस मुकाम तक पहुंच पाई और आगे भी कई विजन पूरे करने हैं।

प्रशभन- आपने बचपन में पढ़ाई कहां से की
उत्तर- मैंने हिसार जिले के गांव फरीदपुर से पांचवीं तक की पढ़ाई की और उसके बाद दशवीं तक खरल गुरुकल में शिक्षा ग्रहण की। मैं आपको बता दूं की मै अपने गांव की पहली लड़की रही हूं जो कि जाट कालेज हिसार में दाखिला लिया व वहीं से स्नातक की पढ़ाई की। इसके साथ ही समाज में फैली धारणाओं को दरकिनार कर पढ़ाई की व इसके बाद गांव की कई लड़कियों ने कॉलेज स्तर की पढ़ाई की।

पशभन- पर्वतारोहण के दौरान किन कठिन परिस्थितियों को सामना करना पड़ता है।
उत्तर- पर्वतारोहण में सिर्फ दो ही रास्ते होते हैं एक तो सफलता मिलती है या फिर मौत। पहाड़ों पर ऊंचाई बढ़ने के साथ साथ ऑक्सीजन की कमी होती जाती है। रास्ते भी अनजान होते हैं। जगह-जगह ग्लेशियर के कारण रास्ते भूलने के बाद कई पर्वतारोही भटक जाते हैं। पर्वतों की चोटियों को फतह करने में दो से तीन महीने लग जाते हैं। इस दौरान खाना पीना व सोना आदि की दिनचर्या बिलकुल बदल जाती है। कदम कदम पर मौत का सामना करना पड़ता है। कई बार पर्वतों पर चढ़ाई के लिए निकलते हैं तो मौसम साफ होता है, लेकिन ऊपर जाने पर मौसम में बदलाव आने पर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्हाेंने कई बार मौत को करीब से देखा है। नेपाल में जब भूकंप आया था उस समय में मिशन पर थी व भूकंप के दौरान कई बड़े पहाड़ टूटकर गिर रहे थे तथा चारों और तबाही का मंजर अपनी आंखों से देखा और आज भी उसे याद कर सिहर उठती हूं। फिर भी हौंसले बुलंद हों तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। 21 मई 2017 को एवरेस्ट चोटी पर तिरंगा फहराया।

प्रशभन- सरकार से पर्वतारोहण मिशन के लिए आपको क्या उम्मीदें हैं।
उत्तर- सरकार को पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए पर्वतारोहियों को प्रोत्साहन देना चाहिए। हरियाणा सरकार ने पर्वतारोहण अकादमी खोली है उसमें कई सुविधाओं की कमी है उन कमियों को पूरा करना चाहिए। इसके अलावा कई और अकादमियों को खेलना चाहिए। देश में पर्वतारोहियों की समस्याओं को देखते हुए कई प्रकार की सुविधाओं का लाभ देना चाहिए। अगर सरकार ऐसा करती है तो बहुत बड़ी बात होगी।
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प्रश्न- युवाओं के लिए क्या संदेश है।
उत्तर- मेरे विचार से युवा वही होता है जिसके दिमाग की सोच व संघर्ष करने की इच्छा शक्ति युवापन को दर्शाती हो। युवा किसी भी कार्य के लिए शॉर्ट कट न अपनाएं। मेहनत व लग्न से अपने लक्ष्य की और बढ़े व सफलता प्राप्त करें।
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