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शो पीस बनकर रह गई हैं शहर में लगी ट्रेफिक लाइटें

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
शहर में ट्रैफिक लाइटें शोपीस बनकर रह गई हैं। दो वर्षों से शहर में सभी चौराहों की लाइटें खराब पड़ी हैं मगर प्रशासन सोया हुआ है। शहर में पांच स्थानों पर ट्रैफिक लाइटें लगी हुईं हैं और विडंबना ये है कि एक भी लाइट काम नहीं कर रही है। नतीजा सभी चौकों पर दिनभर ट्रैफिक व्यवस्था लड़खड़ाई रहती है।
यातायात पुलिस ने कई बार इस समस्या को लिखकर भी दिया है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इन ट्रैफिक लाइटों के खराब होने से आए दिन कोई न कोई हादसा इन चौकों पर होता रहता है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस भी कई बार नगर परिषद को इस समस्या से अवगत करवा चुकी है। मगर अब तक यह लाइटें ठीक नहीं हुई हैं। लोगों ने भी बार-बार प्रशासन को पत्र लिखे हैं पर किसी ने भी सुनवाई नहीं की। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इन ट्रैफिक लाइटों के खराब होने से यातायात संभालने में काफी दिक्कत होती है। हादसा होने का डर भी बना रहता है।
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लाखों रुपये खर्च कर प्रशासन ने ट्रैफिक लाइटें लगवा तो दीं पर कुछ महीने चलने के बाद एक के बाद एक खराब होती गईं और बाद में किसी ने इनकी सुध नहीं ली। कुछ माह तक लाइटें जलने पर लोगों को ग्रीन और रेड लाइट के इशारों पर चलने की आदत भी पड़ने लगी थी। अब एक चौक पर कई-कई कर्मचारी हाथों के इशारों से वाहनों को रोकते दिखाई देते हैं। लोग भी कर्मचारियों के इशारों का कम ही ध्यान करते हैं वे अपनी सुविधा अनुसार वाहन को निकाल लेते हैं और कर्मचारी देखते ही रह जाते हैं। ट्रैफिक लाइटें खराब होने के कारण चौकों पर ट्रैफिक लाइटें लगने का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा। आए दिन इन चौकों पर लाइटें होने के बावजूद जाम लग जाता है। कई लाइटें तो लटक गई हैं। अब वाहन चालक लाइटों की तरफ ध्यान ही नहीं करते, क्योंकि करीब दो साल से सभी लाइटें बंद हैं। उधर, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि सभी ट्रैफिक लाइटों की मरम्मत के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इस बार सभी को ठीक करवाया जाएगा।

इन स्थानों पर खराब पड़ी हैं ट्रैफिक लाइट्स
1. भूमण शाह चौक
2. लालबत्ती चौक (टाउन पार्क)
3. अंबेडकर चौक
4. सांगवान चौक
5. शाह सतनाम चौक

कई बार करवा चुके हैं अवगत : सोढ़ी
नगर परिषद की बैठकों में नप अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है मगर परिषद की ओर से इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। यह मामला शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ा है। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक लाइटें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसे जल्द ठीक करवाया जाना चाहिए। लाइटें हों तो एक चौक पर एक कर्मचारी से काम चल सकता है।
-अनिल सोढ़ी, प्रभारी, यातायात थाना।

क्या कहते हैं लोग
शहर में जगह-जगह पर जाम लगा रहाता है। ट्रैफिक लाइट लगवाने का फैसला अच्छा था पर खराब होने के बाद इनकी कोई सुध लेने वाला ही नहीं है। जब किसी अधिकारी की गाड़ी आती है तो चौक पर तैनात कर्मचारी दूसरे वाहनों को रोक कर अधिकारी की गाड़ी निकाल देते हैं इसलिए उन्हें किसी प्रकार की समस्या का एहसास ही नहीं होता।
-बलदेव, समाज सेवी।

कुछ महीनों तक ट्रैफिक लाइटें जलीं पर बाद में फिर वही ढाक के तीन पात। सभी ट्रैफिक लाइटें खराब पड़ी हैं और इनको ठीक करवाने के लिए प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया इससे जाहिर होता है कि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए प्रशासन जरा भी गंभीर नहीं है।
-दीपक, शहरवासी।

दोपहिया वाहन लेकर भी चौक परा करने मुश्किल हो जाता है। गाड़ी लेकर तो शहर में निकलने से ही डर लगने लगा है। ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार करने के लिए ट्रैफिक लाइटें को ठीक करवाया जाए और लोगों को भी ट्रैफिक नियमों की पालना करनी चाहिए, ताकि उनकी वजह से दूसरों को असुविधा न हो।
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-बलविंद्र, शहरवासी।

शहर में यातायात व्यवस्था को बिगाड़ने में प्रशासन का मुख्य हाथ है। यदि प्रशासन चाहे तो क्या ट्रैफिक लाइटें भी ठीक नहीं हो सकतीं। अधिकारियों को स्वयं दौरा करना चाहिए और जहां समस्या हो उसके समाधान के लिए कदम उठाना चाहिए। सरकार ने अधिकारियों को जनता को सुविधा देने के लिए नियुक्त किया हुआ है। फसली सीजन में किसानों को अपनी फसल मंडी तक ले जाने के लिए महाभारत करनी पड़ती है।
-मन्नू, शहरवासी।
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