सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये की राशि खर्च की जाती है परंतु विकास कार्य या तो अधिकारियों की लेट लतीफी व लापरवाही या फिर राशि के अभाव में अधर में लटककर रह जाते हैं।
जिसके बाद इस तरफ न ही तो अधिकारी ध्यान देते और न ही सरकार। जिसका एक उदाहरण ओढां में कालांवाली रोड़ पर देखा जा रहा है जहां चार वर्षों से एक योजना अधर में लटकी हुई है।
जानकारी मुताबिक स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत ओढां में कालांवाली रोड पर 15 लाख रुपये की लागत से रूरल हट के निर्माण कार्य का शिलान्यास तत्कालीन सांसद डॉ. अशोक तंवर ने 16 अक्टूबर 2011 को किया था।
बताया जा रहा है कि उक्त निर्माण कार्य के लिए सर्वप्रथम करीब 11 लाख रुपये की राशि का चेक खंड कार्यालय ओढां में भेजा गया क्योंकि इसका समूह निर्माण खंड कार्यालय की तरफ से किया जाना था।
शुरुआती दौर के कार्य में तेजी लाते हुए पंचायत विभाग ने तीन कमरे व खाली जगह पर दुकानदारों को सामान रखने के लिए सात छोटे सीमेंटेड शेडों का निर्माण करवा दिया।
उसके बाद इस कार्य की किसी भी अधिकारी ने सुध नहीं ली जिसके चलते विभाग की उक्त योजना न केवल खटाई में पड़कर रह गई है बल्कि जिस उद्देश्य को लेकर इसका निर्माण किया जाना था वो भी चार वर्षों से अधूरा है।
मौजूदा स्थिति ये है कि सड़क के बिल्कुल छोर पर बनाए गए इस रूरल हट के कमरे शरारती तत्वों की शरण स्थली बने हुए हैं।
रात्रि के समय नशेड़ी व अन्य शरारती तत्व यहां मंडराते रहते हैं और आवारा पशुओं का भी जमावड़ा यहीं लगता है।
क्या थी योजना
पंचायत विभाग द्वारा स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत ओढां में रूरल हट बनाने के लिए ग्राम पंचायत ने करीब आधा एकड़ भूमि का प्रस्ताव पारित किया था।
योजना ये थी कि जो लोग खुले में सब्जियां व अन्य दुकानें लगाकर अपना रोजगार चलाते हैं जो कि बरसात या खराब मौसम में यहां अपनी दुकानें लगा सकें और खरीददार यहीं से वस्तु खरीद सकें।
जिसके लिए अलग अलग छोटे सात सीमेंटेड शेडों का निर्माण करवाया गया जबकि उनके सामने सामान रखने हेतु चबूतरे बनाने की जगह छोड़ी गई है तथा चारदीवारी भी अधर में लटकी हुई है।
पंचायत की नहीं कोई भूमिका: सरपंच
इस बारे में ग्राम निवर्तमान सरपंच नरेंद्र मल्हान ने बताया कि इसका जो भी पैसा आया था वो बीडीपीओ कार्यालय में आया था और कार्यालय की तरफ से निर्माण होना था।
पंचायत की इसमें कोई भूमिका नहीं है। मैंने फिर भी तत्कालीन बीडीपीओ राजेश शर्मा को अवगत करवाया था जहां उन्होंने किश्त न आने की बात कही थी।
नहीं आई पांच लाख की किस्त : बीडीपीओ
इस बारे खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी बलराज सिंह ने बताया कि इस योजना में एक और किस्त आनी थी जो कि तकरीबन पांच लाख रुपये है। राशि आते ही इसे पूरा करवाया जाएगा। हमने विभाग को इस विषय में अवगत करवा रखा है।