ओढां। सरसों की बिक्री किसानों के लिए फांस बन गई है। पिछले तीन दिन से मंडी में सरसों लेकर बैठे किसानों का शनिवार को सब्र का बांध टूट गया। अव्यवस्थाओं से जूझ रहे किसान मंडी के गेट केे सामने नेशनल हाईवे के बीचों-बीच दरी बिछाकर बैठ गए। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर भड़ास निकाली। सूचना पाकर थाना प्रभारी पवन कुमार ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाया कि रोड जाम करना किसी समस्या का समाधान नहीं है। जिसके बाद किसान करीब 15 मिनट बाद रोड से हट गए।
थाना प्रभारी ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को सूचना देकर मौके पर बुलाया। करीब 2 घंटे तक चले हंगामे उपरांत तोल बढ़ाने एवं ट्रालियों के नंबर लगाने पर बनी सहमति के बाद किसान शांत हुए। वहीं अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार व जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी अशोक बसंल, कालांवाली के डीएसपी नरसिंह मौके पर पहुंचे। सरकार के निर्देशानुसार 9 से 11 मई तक उन किसानों को 3 दिन दिए गए थे जो सरसों बेचने से वंचित रह गए थे। ओढ़ा की अनाज मंडी में नुहियांवाली, बनवाला, ओढां, मलिकपुरा, जंडवाला जटान, चोरमार, घुंकावाली सहित अनेक गांवों के किसान पिछले तीन दिनों से सरसों बेचने के लिए बैठे हैं। लेकिन मंडी में तोल व बारदाने सहित अन्य समस्याओं के चलते न ही तो खरीद हो रही और न ही तोल। पिछले दस दिन के अंतराल में करीब 400 किसानों को गेट पास दे दिए गए। लेकिन फिर भी तोल नहीं हो पा रहा।
किसान बोले- हमें जाम लगाने का शौक नहीं
पिछले तीन दिनों से मंडी पर बैठे किसानों को शनिवार को सब्र का बांध टूट गया। उग्र हुए किसान हाईवे के बीचों-बीच दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पाकर थाना प्रभारी पवन कुमार ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाया कि रोड जाम करना किसी समस्या का हल नहीं अपितु कानूनी जुर्म है। जिस पर किसानों ने कहा कि उन्हें रोड जाम करने का कोई शौक नहीं है। लेकिन उन्हें मजबूरन ये कदम उठाना पड़ा है। थाना प्रभारी ने किसानों को ये आश्वासन देकर हाईवे से हटाया कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को अभी यहां बुला लिया जाएगा। जिसके बाद करीब 15 मिनट उपरांत हाईवे पर यातायात सुचारु हो पाया।
110 रुपये प्रति क्विंटल ले रहे ज्यादा
किसानों ने कहा कि मंडी में महज 2 सरकारी तोल है जिनके पास बारदाना भी नहीं है। जबकि निजी तोल 4 हैं जिनके पास बारदाना है। लेकिन वे करीब 110 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तोल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडी में 3 दिन के अंतराल में करीब 430 में से 30 ट्रॉली ही तोली गई हैं। लेकिन निजी तोल दिनभर में करीब 40 ट्रॉली तोल रहे हैं। किसानों ने सरकारी तोल, उठान व खरीद को ऊंट के मुंह में जीरे के समान बताया। किसानों ने इस अव्यवस्था को लेकर सरकार को खूब कोसा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा शुक्रवार को ओढां बस स्टैंड पर लोगों से मिलने व रेहड़ी से जूस पीने पर किसानों ने प्रतिक्रिया देेते हुए कहा कि सीएम जिस जगह रुके थे उसके सामने सैकड़ों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर सरसों बेचने के लिए लाईनों में खड़े थे। लेकिन वे सीएम को नजर क्यों नहीं आए।
खाद्य आपूर्ति अधिकारी को सुनाई खरी-खरी
जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी अशोक बंसल को किसानों ने खूब खरी-खरी सुनाई। जिसके बाद उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि तोल और बढ़ा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएम रोडवेज से बात कर खाली पड़े बस अड्डे में अतिरिक्त तोल लगवाया जाएगा। ताकि किसानों को कोई दिक्कत न आए। थाना प्रभारी के आश्वासन के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के नंबर लगवाकर किसानों को शांत किया गया।