अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
जिले में हुई हल्की बूंदाबांदी औैर चल रही तेज हवाओं से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं। शुक्रवार सुबह से ही बादलवाई के साथ तेज हवा चलने व बूंदाबांदी शुरू होने से खेतों में पककर तैयार खड़ी गेहूं की फसल पर खतरे के बादल मंडराने लगे। किसानों का कहना है कि रबी की फसल पककर तैयार हुई है और मौसम की करवट बदलने से पकी पकाई फसल खराब हो सकती है। इस समय तो 10-15 दिन मौसम साफ रहे तो ही ठीक है वरना तो घाटा ही है।
इस बार जिले में गेहूं की बिजाई तीन लाख पांच हजार हेक्टेयर में की गई है। उधर मंडियों में पहुची सरसों की फसल में भी नमी बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। किसान राम कुमतार, महेंद्र सिंह, जगदीश, विकास कुमार, पृथ्वी सिंह का कहना है कि अब सरसों की फसल की तो कटाई हो गई है तथा सरसों को निकाल कर मंडियों तक पहुंचाया जा रहा है लेकिन गेहूं की फसल खेतों में पक कर तैयार खड़ी है व एक दो दिन में कटाई और कढ़ाई शुरू करनी थी लेकिन मौसम की करवट बदलने से फसल पर खतरा मंडराने लगा है। किसानों का कहना है कि लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही खेती पर दोहरी मार पड़ रही है। एक और तो किसानों को फसलों के उचित भाव नहीं मिल रहे दूसरी और फसल पकने पर आने पर तेज हवा व बारिश से नुकसान। इनका कहना है कि अब तो 10-15 दिन मौसम साफ रहे तो ही फसल को बचाया जा सकता है। इस बेमौसमी बारिश से कोई फायदा नहीं होगा।
धूप और बूंदाबांदी का चलता रहा खेल
सुबह आठ बजे आसमान पर छाये काले बादल देखकर किसानों की नींद ही उड़ गई। नौै बजे जैसे ही बूंदाबांदी शुरू हुई किसान की धड़कने बढ़ने लगी। मौसम करवट बदलता रहा। एक बार को धूप निकल गई फिर बूंदाबांदी होने लगी। इस बूंदाबांदी से कई दिन से उड़ रही धूल जम गई
तेज हवाओं के साथ मौसम पलटा, घबराए किसान
उधर, ऐलनाबाद क्षेत्र में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली है। एक सप्ताह की करारी धूप के बाद शुक्रवार को बादलों से झमाझम बरसात शुरू हुई जिससे किसानों के खिले चेहरे मुरझा गए। पांच मिनट तक बादल बरसने के बाद बरसात रुक गई, जबकि आसमानी बिजली की तेज गर्जना के साथ काले घने बादल छाए रहे। दोपहर सवा 12 बजे एक बार फिर बारिश शुरू हुई जो कि करीब दस मिनट तक जारी रही। किसान अब खेतों में अपनी पक कर तैयार खड़ी फसल संभालने में व्यस्त है। ऐसे में अगर मौसम में कुछ परिवर्तन होता है तो किसानों की सारी मेहनत पर पानी फिर सकता है।