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सरकारी स्कूलों में फीस के बदले मिलेगी रसीद

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
दशकों के संघर्ष के बाद आखिरकार शिक्षा बोर्ड सरकारी स्कूलों के बच्चों को फीस की एवज में रसीद देने को तैयार हो गया है। रसीद पर फीस का विवरण अंकित होगा। इस बारे में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देशों की पालना करने की हिदायत दी है।
विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी किए गए पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि बच्चों के अभिभावकों से वसूली गई फीस की रसीद दी जाए। रसीद पर फंड का विवरण दिया जाए। इसके साथ ही स्कूल में नोटिस बोर्ड पर फीस का विवरण भी चस्पा किया जाए ताकि बच्चे व उनके अभिभावक यह जान सकें कि फीस कितनी है। निदेशालय की ओर से कक्षा नौवीं से लेकर बारहवीं तक की कक्षा के विद्यार्थियों की फीस का भी विवरण दिया गया है। इससे अधिक फीस बच्चों से नहीं वसूली जा सकेगी। अब तक स्कूलों में फीस की एवज में किसी प्रकार की रसीद नहीं दी जाती थी। अध्यापकों द्वारा मांगी गई फीस अभिभावक अदा करने को विवश थे और उन्हें यह भी ज्ञात नहीं हो पाता था कि अमुक फीस किस मद में ली गई है। उल्लेखनीय है कि आरटीआई एक्टिविस्ट प्रो. करतार सिंह ने सरकारी स्कूलों में फीस की रसीद दिए जाने की आवाज उठाई थी। लंबे संघर्ष के बाद विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने इस वर्ष इसे लागू करने का निर्णय लिया है।
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फीस के नाम पर होती थी लूट
सरकारी स्कूलों में फीस का विवरण न होने की वजह से अभिभावकों से मनमानी फीस वसूल ली जाती थी। इस अतिरिक्त पैसे का कोई विवरण नहीं होता था। अभिभावक यह भी नहीं जान पाते थे कि बच्चे की असल फीस कितनी है। स्कूल ने जो मांगा वही फीस बन जाती थी। लेकिन अब रसीद होने से स्कूल अधिक फीस नहीं वसूल पाएंगे।
अधिक फीस वसूली पर दर्ज हो चुका है मामला
अनाज मंडी स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में कुछ वर्ष पूर्व फीस के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया था। आरटीआई से मांगी गई जानकारी से यह पता लगा था कि स्कूल प्रिंसिपल व अन्य ने मिलकर साइकिल स्टैंड, पीटीएम, स्टाइफंड, ट्यूबवेल फंड सहित अन्य फंडों के नाम पर पैसा बटोरा। पीटीएम के फंड से टीचरों ने जूस पिया। बच्चों से पैसे वसूलकर सरकारी ट्यूबवेल की मरम्मत करवाई। इसके अलावा बच्चों द्वारा स्टाइफंड में जमा करवाए गए पैसे लौटाने की बजाए डकार लिए गए। इस मामले में आधा दर्जन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।
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प्राइवेट स्कूलों पर कौन डाले नकेल?
विद्यालय शिक्षा निदेशालय द्वारा सरकारी स्कूलों के लिए तो बेहतरीन दिशा-निर्देश जारी कर दिए, लेकिन प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कौन कसेगा। प्राइवेट स्कूलों द्वारा भी मनमानी फीस वसूली जाती है। इस फीस का कोई विवरण बच्चों अथवा अभिभावकों को नहीं दिया जाता। हर साल फीस में बढ़ौतरी कर दी जाती है। इसके अलावा हर साल एडमिशन के नाम पर जेब तराशी जाती है। उधर जिला शिक्षा अधिकारी यज्ञदत्त वर्मा ने कहा कि अगर कोई स्कूल निर्धारित फीस से ज्यादा लेता है तो शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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