सिरसा। गांव मंगाला से जिला नागरिक अस्पताल में शनिवार सुबह डिलिवरी के लिए आई एक महिला और उसके पारिवारिक सदस्य सिविल अस्पताल में आए। महिला के पेट में सात माह का गर्भ था। सुबह से शाम तक वे डिलिवरी का इंतजार करते रहे। लेकिन डिलिवरी न होने पर जब अस्पताल प्रबंधन ने निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर से अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। जब परिवार के सदस्य महिला का अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए गए तो वे रिपोर्ट में बच्चा गर्भ में न होना आया। इससे परिवार के सदस्य हैरान हो गए। जब परिजनों को इस बात का पता चला तो उन्होंने स्टाफ सदस्यों पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए। जिसके बाद परिजनों ने महिला थाना में इस संबंधी शिकायत दर्ज करवाई। वहीं अस्पताल प्रबंधन पूरे मामले की जांच कर रहा है।
मामले के अनुसार गांव मंगाला निवासी सुरेंद्र ने बताया कि उसकी पत्नी के सात माह का गर्भ था। शनिवार सुबह करीब सात बजे उसकी प्रसव पीड़ा शुरू हुई। जिसके बाद वह उसे लेकर माधोसिंघाना स्वास्थ्य केंद्र में चला गया। वहां जांच के बाद स्टाफ सदस्यों ने उसे सिरसा नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया। शनिवार सुबह आठ बजे वे सिविल अस्पताल में दाखिल हो गए। यहां आने के बाद भी काफी देर तक स्टाफ सदस्य कहते रहे कि डिलिवरी हो जाएगी। सांय करीब चार बजे डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड के लिए कहा। जब वे अल्ट्रासाउंड केंद्र पर गए तो जांच में पता चला कि महिला के गर्भ में बच्चा है ही नहीं। जिसके बाद परिजन हैरान रह गए। परिजनों का आरोप है कि अगर बच्चा मिसकैरेज हुआ है तो स्टाफ सदस्य कम से कम उन्हें सूचित तो करते, लेकिन उन्हें कुछ नहीं बताया गया। इसके बाद परिजन महिला थाने में गए और इस संबंधी शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस कर्मचारी अस्पताल में पहुंचे और महिला व परिजनों के बयान दर्ज किए। महिला के पति सुरेंद्र सिंह का कहना है कि करीब डेढ़ माह पहले जब अल्ट्रासाउंड करवाया था तो गर्भ में बच्चा था।
गत दिवस महिला डिलिवरी के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थी। बच्चा मिसकैरेज हुआ है। अब ये जांच का विषय है कि मिसकैरेज सिरसा सिविल अस्पताल में हुआ है या फिर माधोसिंघाना में। अगर स्टाफ की लापरवाही सामने आती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. वीरेश भूषण, डिप्टी सिविल सर्जन सिरसा।