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रामपुरा बागडिय़ा के सरपंच को सस्पेंड तो रानियां थाना प्रभारी व एक पुलिस कर्मी को लाइन हाजिर करने के निर्देश

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रामपुरा बागड़िया के सरपंच को सस्पेंड, रानियां थाना प्रभारी, पुलिस कर्मचारी को लाइन हाजिर करने के निर्देश
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सिरसा। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक रविवार को स्थानीय पंचायत भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने की। पंचायती जमीन पर कब्जे की शिकायत पर उन्होंने तल्ख तेवर दिखाते हुए एक सरपंच को सस्पेंड करने, एक थाना प्रभारी व पुलिस कर्मी को लाइन हाजिर करने व पैसे के लेनदेन के मामले में एक व्यक्ति पर केस दर्ज करने के निर्देश दिए। बैठक में कुल 29 शिकायतें रखी गई। जिनमें से मंत्री ने 17 का निपटारा करवा दिया। जबकि 12 शिकायतों को जांच के लिए पेंडिंग रखा है।
एजेंडे में रखी गई शिकायत नंबर 2 गांव रामपुरा बागड़िया से थी। शिकायतकर्ता ग्रामीणों ओमप्रकाश व योगराज पुत्र राजकुमार ने आरोप लगाया था कि गांव के मौजूदा सरपंच मोहर सिंह व उसके भाइयों ने पंचायती जमीन पर कब्जा किया हुआ है। उक्त शिकायत पिछली तीन बैठकों से ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग में चल रही थी। अधिकारियों व ग्रीवेंस कमेटी के सदस्यों की जांच में सामने आया कि सरपंच व उसके भाइयों ने पंचायती भूमि पर कब्जा कर मकान बना रखे हैं। मंत्री ने आज बैठक में शिकायत का निपटारा करते हुए ग्राम सरपंच मोहर सिंह को सस्पेंड करने व पंचायती भूमि पर किए गए कब्जे को छुड़वाने के निर्देश दिए। हालांकि गांव के मौजूदा सरपंच भी बैठक में पहुंचे थे और उन्होंने अपना पक्ष रखना चाहा। लेकिन मंत्री ने कहा कि जब आपको बुलाया ही नहीं है तो क्यों आए हो। जिसपर वे बाहर चले गए।
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रानियां थाना प्रभारी व एक पुलिस कर्मी को लाइन हाजिर करने के निर्देश
5वीं शिकायत जीत राम पुत्र जीवनाराम व रामप्रताप पुत्र बीझाराम निवासी बाहिया की थी। शिकायत थी की उन्होंने गांव मतुवाला में जमीन खरीदी थी। जिसकी निशानदेही करवाकर छोड़ दी। गांव मत्तुवाला के ही आदराम नाम के व्यक्ति ने उक्त जमीन पर कब्जा कर उसमें ग्वार की फसल की बिजाई कर दी। उन्होंने खेतों में जाकर फसल को ट्रैक्टर से नष्ट कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ। मामला थाने पहुंचा। पुलिस ने कब्जा करने वाले आदराम की शिकायत पर उनके खिलाफ की केस दर्ज कर दिया। राज्यमंत्री ने जब इस संबंध में रानियां के एसएचओ दलेराम से पूछा तो उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं थी। वहीं मामले के इंचार्ज चंदन सिंह ने मामले की जो जानकारी दी। उस पर मंत्री ने थाना प्रभारी व पुलिस कर्मी को झाड़ लगाते हुए कहा कि जब आपको केस के बारे में जानकारी ही नहीं है। जिसकी जमीन है उसके खिलाफ ही केस दर्ज कर रहे हो। मंत्री ने एसपी को निर्देश देकर दोनों को लाइन हाजिर करने को कहा।
डीएसपी को बोले मंत्री-मुझे नहीं पता, पशु व्यापारी को शाम से पहले गिरफ्तार करो
तीसरी शिकायत में सिरसा के रानियां गेट निवासी मंटोरी लाल ने बताया कि वह भैंसों की डेयरी करता है। उसने बताया कि कुछ समय पूर्व उसे पैसों की जरूरत थी। जिस पर उसने एक पशु व्यापारी को दो भैंसें बेची थी। पशु व्यापारी से उसे 2.80 लाख रुपए लेने थे। पशु व्यापारी आज कल में पैसे देने की बात करते-करते पैसे देने से मुकर गया। उसने पुलिस के तमाम अधिकारियों से शिकायत की। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद पिछली मीटिंग में मामला ग्रीवेंस कमेटी में आ गया। मंत्री ने पिछली मीटिंग में भी अधिकारियों को पशु व्यापारी को पेश करने के निर्देश दिए थे। लेकिन वह आज भी पेश नहीं हुआ। मंत्री ने इस पर डीएसपी सिटी से जवाब मांगा। डीएसपी ने कहा कि वह बार-बार बुलाने पर नहीं आ रहा है तो मंत्री ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि मुझे नहीं पता, सांय से पहले केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर रिपोर्ट करो।
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युवती के बात न सुनने पर बैठक से किया बाहर
शिकायत नंबर 24 में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय की एक महिला कर्मचारी द्वारा विवि के ही एक अधिकारी पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने व निर्धारित समय के बाद भी बैठाकर रखने के आरोप लगाए गए थे। जब मंत्री ने शिकायतकर्ता युवती को बुलाया तो युवती ने विवि के अधिकारियों पर अनगिनत आरोप लगाने शुरू कर दिए। हालांकि इस दौरान मंत्री बार-बार युवती से अधिकारियों की बात सुनने की गुहार लगाते रहे, लेकिन युवती ने कोई सुनवाई नहीं की। जिसके बाद मंत्री ने शिकायत को डिस्पोज ऑफ कर शिकायतकर्ता युवती व उसके साथ आए परिजनों को बाहर जाने को कहा। बाहर जाने के दौरान भी युवती यही कहती रही कि सभी मिले हुए हैं। सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है। बेटियों की जब सुनवाई ही नहीं हो रही तो नारा कैसा। मीटिंग में करीब आधा दर्जन शिकायतों का अधिकारियों की ओर से शिकायत कर्ताओं की समस्याएं हल करने पर मंत्री का धन्यवाद भी किया। मनरेगा रोजगार सहायकों के मामले में पिछली बैठक में एडीसी कार्यालय के कर्मचारियों के वेतन रोकने के आदेश को आज की बैठक में मंत्री ने रद्द कर दिया। एडीसी अमना तस्नीम ने बताया कि मजदूरों की राशि का एस्टिमेट बनाकर फाइल चंडीगढ़ भेज दी है। राशि आते ही इनके खातों में डलवा दी जाएगी।
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