अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। पिछले दो दिनों से मौसम में आए बदलाव से ठंड बढ़ने के साथ-साथ किसानों की धड़कने बढ़ने लगी है। बुधवार को बादलवाई और हल्की बूंदाबांदी से किसानों को चिंता सताने लगी की बारिश के साथ आंधी और ओलावृष्टि होती है तो नुकसान ज्यादा हो सकता है। इस बार तीन लाख पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बिजाई की गई है। जिस पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। पकने के कगार पर खड़ी गेहूं और सरसों की फसल में नुकसान की आशंका से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं।
किसानों को कहना है कि पकने के कगार पर खड़ी फसल को बारिश की कोई आवश्यकता नहीं है। किसान महेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, राम कुमार का कहना है कि सरसों की फसल तो पककर तैयार खड़ी है तथा बारिश से नुकसान ही होगा तथा गेहूं की फसल पकने वाली है बारिश केे साथ तेज हवा व ओलावृष्टि होती है तो गेहूं की फसल जमीन पर बिछ सकती है। इनका कहना है कि अब तो बारिश से नुकसान ज्यादा और फायदा कम होगा। मौसम साफ रहने में ही फायदा है। लगातार घाटे के सौदा बनती जा रही खेती को लेकर मौसम की करवट से किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है। पहले ज्यादा गर्मी ज्यादा पड़ने से गेहूं की बालियां पकने की बजाय असमय ही सूखने लगी थी। अब जैसे तैसे पकने के कगार पर आई तो मौसम खरब कर सकता है। किसान राम कुमार और सुभाष चंद्र, अलीका गांव के किसान नत्थू राम व जगदीश का कहना है कि गेहूं की फसल पकने में अभी समय पड़ा है और बादलवाई व तेज हवाओं से डर है कि गेहूं की फसल जमीन पर ना बिछ जाए। इनका कहना है एक तो सरकार फसलों के उचित भाव नहीं दे रही है दूसरी तरफ फसलों पर मौसम की मार पड़ रही है। सरकार व प्रकृति दोनों की मार सहना दूभर हो गया है।
हल्की बूंदाबांदी से तो कोई खतरा नहीं : डॉ. बहादर राम गोदारा
कृषि विकास अधिकारी डॉ. बहादर राम गोदारा का कहना है कि अब बादलवाई तो हो रही है थोड़ी बारिश से तो फसल को कोई नुकसान नहीं है। अगर बारिश के साथ ओलावृष्टि या आंधी आती है तो नुकसानदायक हो सकती है।