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खेतों में आसमान से बरसा सोना

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा। इस सीजन की पहली बारिश से गेहूं, चना और सरसों उत्पादकों के चेहरे खिल उठे हैं। जिले में बूंदाबांदी इन फसलों के लिए मोती बनकर बरसी है। किसानों को बारिश का ही इंतजार था और सोमवार को आसमान में छाए बादल और बूंदाबांदी ने उन्हें मुस्कुराने का अवसर प्रदान कर दिया। बारिश होने से मौसम में ठंडक कुछ कम हुई है, अब आने वाले दिनों में धुंध पड़ने का रास्ता भी साफ हो गया है। धुंध गेहूं की फसल के लिए संजीवनी का कार्य करती है।
गेहूं की अगेती बिजाई करने वाले किसान इन दिनों आसमान को ही निहार रहे थे। किसान ओमप्रकाश सैनी, नरेश कुमार, राकेश कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए धुंध जरूरी है। धुंध में ही गेहूं की फसल को फुटाव आता है और उसके अच्छी बाली बनती है, जिससे गेहूं उत्पादन बढ़ने की संभावना बनती है। दिसंबर माह के दो सप्ताह बाद तक भी बारिश न होने से किसानों को उत्पादन कम होने का भय सताने लगा था, लेकिन बारिश के साथ ही उनके चेहरे खिल उठे हैं। जब किसानों की जरूरत थी, तभी इंद्रदेव ने उनके खेतों में मोती समान बारिश कर डाली है।
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कृषि विभाग के उप निदेशक बाबूलाल का कहना है कि गेहूं के साथ-साथ चना और सरसों की फसल को भी इस बारिश से लाभ होगा। बरानी एरिया में चना और सरसों की फसल के लिए बारिश किसी प्रसाद से कम नहीं है। सिरसा जिला का एक बड़ा भूभाग बरानी भी है, जिसमें किसान सरसों व चने की फसल उगाते हैं। ऐसे किसानों को बारिश से ही आस रहती है। किसान नरेश कुमार का कहना है कि बारिश होती है तो फसल तैयार हो पाती है, अन्यथा बीज भी पल्ले पड़ने की नौबत आ जाती है।

अगले तीन दिन बारिश की संभावना
मौसम विभाग की ओर से हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत के हिस्सों में तीन दिनों तक बारिश की संभावना जताई गई है, जिसकी वजह से आने वाले दिनों में भी खेतों की प्यास आसानी से बुझ पाएगी। प्रतिकूल मौसम की मार झेल रहे किसानों को समय पर हुई बारिश से कुछ आस बंधी है।

शहर में कीचड़ की स्थिति
ग्रामीण क्षेत्र एक ओर जहां बारिश वरदान साबित हुई है, वहीं बारिश के कारण शहरी क्षेत्र में परेशानी पैदा हो गई है। शहर की टूटी सड़कों पर बारिश के पानी के ठहराव ने लोगों को अधिक मुश्किल में डाल दिया है। स्थिति यह है कि कोई व्यक्ति शहर की सड़कों पर पैदल भी नहीं चल सकता। जगह बने गड्ढे और उनमें भरा पानी। पूरा बाजार और गलियां कीचड़ से अटी पड़ी है। जो बारिश का पानी एकत्रित हुआ है, उसकी निकासी का भी कोई बंदोबस्त नहीं है। ऐसे में लोग सरकार व प्रशासन को कोस रहें है।
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बरसात से नव अंकुरित फसलों को मिला जीवनदान
ऐलनाबाद। सोमवार दोपहर लगातार दो घंटे तक हुई बूंदाबांदी से क्षेत्र के किसानों के मुरझाए चेहरे पर फिर से रौनक लौट आई है।इस बरसात से गेहूं चना सरसों और सब्जियों की फसलों को जीवनदान मिला है वही आज हुई अच्छी बूंदाबांदी के बाद तापमान में तेजी से गिरावट आई है, जिससे ठंड ने लोगों को कंपकंपा दिया व दिन भर सूर्य देव को बादलों ने ढक कर रखा। इस क्षेत्र को मूलत: नरमा कपास की फसल ही आर्थिक आधार प्रदान करती है। आर्थिक तौर पर कमजोर पड़े किसानों की आय अब सरसों, चना, गेहूं व सब्जियों की पैदावार से सुधारने पर टिकी है।
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