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किसानों ने पैसे इकट्ठे कर खुद ही उठाया खालों की मरम्मत का बीड़ा

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--विभाग बोला, कमेटी करवाएगी नालियों की मरम्मत
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अमर उजाला ब्यूरो
ओढां।
बड़ागुढा खंड के गांव अलीकां में नहरी एवं सिंचाई विभाग की कार्य प्रणाली से खफा किसानों ने अपने स्तर पर नालियों (खालों) की मरम्मत का बीड़ा उठाया है। किसानों का कहना है कि खालों की हालत जर्जर होने के कारण उनके खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा जिसके चलते रकबा क्षेत्र के किसानाें ने पैसे एकत्र कर मजबूरन खालों की मुरम्मत का कार्य चलाना पड़ा। किसानों ने विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार अवगत करवाने के बावजूद अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
शेखूपुरा माइनर के मोघों के नीचे पड़ने वाले रकबा क्षेत्र में जो पूर्व में खाल बने हुए हैं वे जगह-जगह से लिकेज होेने के कारण बार-बार टूटते रहते हैं। इससे उनके खेतों में पानी नहीं पहुंच पाता। 17025 मोघा के अधीनस्थ पड़ने वाले किसान श्यामलाल, बंसीलाल, राजू सिंह, निशान सिंह, जयदयाल व हरदेव सिंह आदि ने बताया कि उनका रकबा जिस खाल से सिंचित होता है वह खाल काफी पुराना हो चुका है और उसका अंदरूनी व बाहरी हिस्सा जगह-जगह से लिकेज होने से खाल टूटता रहता है। इसके चलते उनके खेतों में ठीक तरह से पानी नहीं पहुंच पाता। उक्त किसानों ने बताया कि उन्होंने इस बारे विभाग को कई बार अवगत करवा दिया लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया। इस विभागीय अनदेखी के चलते उक्त किसानों ने रकबा क्षेत्र के अनुसार पैसे एकत्र कर अपने स्तर पर खाल की मुरम्मत करने का कार्य शुरू किया है।
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विभाग के भरोसे नहीं छोड़ सकते काम
वहीं मोघा नंबर 10108 के अधीन पड़ने वाले अलीकां, भीमां, थराज व पंजुआना के किसान राजू ग्रोवर, हंसराज, बलविंद्र सिंह, मक्खन सिंह आदि का कहना है कि उनके खाल की भी हालत अति जर्जर है। जिसके चलते उन्होंने भी रकबा के हिसाब से पैसे एकत्र कर मुरम्मत का कार्य शुरू किया है। उन्होंने बताया कि खरीफ की फसल तो जैसे-तैसे पूरी कर ली लेकिन अब रबी की फसल का समय आने वाला है इसलिए खाल की जर्जर हालत को विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

संबंधित विभाग ने कभी सुध नहीं ली
उधर मोघा नंबर 29 हजार के किसान बलविंद्र सिंह, हरबंस सिंह, निशान सिंह, लीला सिंह व टीटू सिंह ने बताया कि उनके खाल की विभाग ने कभी भी सुध नहीं ली। खाल जगह-जगह से टूटकर खरपतवार से अटा पड़ा है जिससे पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता। इसी प्रकार मोघा नंबर 23790 के अधीन पड़ने वाले किसान जगदीश कुमार काला सिंह भोला सिंह जगसीर सिंह ने भी खाल की जर्जर हालत पर विभाग को आड़े हाथों लेते हुए बताया कि विभाग के अधिकारी किसानों की खालों संबंधी समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे जिसके चलते वे आर्थिक तंगी से जूझकर रह जाते हैं। वहीं मोघा नंबर 11385 नीचे सींचित होने वाली भूमि के काश्तकार मक्खन सिंह, गुरनेब सिंह, सीमा सिंह, लाभ सिंह, सोनू राम, रामेश्वर, सीरा सिंह आदि किसानों ने भी जर्जर खाल की दशा बताते हुए कहा कि खाल जगह-जगह से लीकेज होने के कारण पानी उनके खेतों तक नहीं पहुंच पाता। जिसके चलते उन्होंने भी पैसे इक ट्ठे कर खाल की मुरम्मत करने का कार्य शुरू किया है।
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बॉक्स :-
हम नाबार्ड से पैसा लेकर खाल की मरम्मत या नया खाल बनाते हैं। उस समय 20 वर्ष के लिए एक कमेटी का गठन किया जाता है और कमेटी किसान से प्रति एकड़ के हिसाब से 50 रुपये लेती है। ये पैसा कमेटी के खाते में जमा होता है। 20 साल तक अगर खाल टूटता है तो नियमानुसार उस पैसे के ब्याज से ही खाल की मरम्मत करवाना होता है। विभाग खाल रिपेयर नहीं करवाता।
-डीके गर्ग, एसडीओ सब-डिवीजन पंजुआना
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फोटो :23: गांव अलीकां में जर्जर खाल का दृश्य
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