पुलिस ने 20 स्कूली बसाें के काटे चालान
तीन को किया इंपाउंड, प्राइवेट स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा का नहीं है ख्याल
बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय ने जारी किए है मापदंड
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
नियमों का पालन न करने पर ट्रैफिक पुलिस ने मंगलवार को 20 स्कूली बसों के चालान काटे। इसके अलावा 3 बसों को इंपाउंड किया गया।
जिले की सड़कों पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से स्कूली बसें दौड़ रही है। बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी है पर स्कूलों के संचालकों को कोई परवाह नहीं है। बसों में जरूरी सुरक्षा मापदंडों को पूरा नहीं किया जाता, जिसकी वजह से कई बार बडे़ हादसे घटित हो चुके है। स्कूली वाहनों के मामले में उच्च न्यायालय ने सुरक्षा के मापदंड निर्धारित कर उन्हें लागू करने के निर्देश दिए थे। उसके बाद कई बार गठित टीमों ने छापामारी भी की पर स्कूलों के संचालकों पर कोई असर नहीं हुआ। नियमों की पालना करने की जिम्मेवारी जिला पुलिस की है। लेकिन स्कूल संचालक सुरक्षा मापदंडों की परवाह किए बगैर उन्हें सड़कों पर दौड़ा रहे है।
ट्रेफिक पुलिस की ओर से मंगलवार को स्कूली बसों की चेकिंग का अभियान चलाया गया, जिसमें 20 स्कूली बसों के चालान किए गए, जोकि सुरक्षा मापदंडों को पूरा नहीं करती थीं। ट्रेफिक पुलिस के अभियान से सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले स्कूल संचालकों में अफरा तफरी मच गई हैं।
जारी रहेगा जांच अभियान : सोढ़ी
यातायात पुलिस प्रभारी अनिल सोढ़ी ने बताया कि स्कूल बसों की चेकिंग का अभियान 21 जुलाई तक जारी रहेगा। सुरक्षा मापदंडों को पूरा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। किसी भी सूरत में नियमों की अवहेलना नहीं करने दी जाएगी। मंगलवार को 20 बसों के चालान काटे गए और तीन बसाें को इंपाऊंड किया गया।
स्कूली वाहनों के लिए नियम
- सभी स्कूल वाहनों का रंग पीला होना चाहिए
- वाहनाें पर रिफ्लेक्टर लगे हों
- वाहनों में स्पीड गर्वनर फिट होने चाहिए
- वाहन पर काले रंग से स्कूल बस और किराए पर है तो ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए
- सभी वाहन परमिट और अनुमति सहित होने चाहिए
- स्कूल वाहन चालक का ड्राइविंग में पिछले पांच साल का अनुभव होना चाहिए
- वाहन चालक पर पिछले पांच सालों में ड्राइविंग के महत्वपूर्ण ऑफेंस न लगे हों
- वाहन का परिचालक और अटेंडेंट यूथ को हैंडल करने को लेकर प्रशिक्षित हो
- संस्थान में वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह हो
- स्कूल वाहन में प्रथम उपचार पेटिका हो
- वाहन पर रूट और स्कूल के नाम का बोर्ड लगा होना चाहिए
- वाहन के बाहरी और भीतरी साइड में पुलिस कंट्रोल रूम का व बस के मालिक का फोन नंबर अंकित हो
- वाहन के चालक व परिचालक का तीन साल में एक बार रिफ्रेशर कोर्स होना चाहिए
- वाहन के चालक का हर तीन साल में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है
- वाहन के चालक और परिचालक यूनिफोर्म में हों और उस पर उनका नाम व लाइसेंस नंबर लिखा होना चाहिए
- वाहन की बैठने की सीटों से डेढ़ गुणा अधिक विद्यार्थियों को वाहन में नहीं चढाया जा सकता
- किसी प्रकार के नियम की अवहेलना करने वा संबंधित प्राधिकरण द्वारा वाहन की आरसी या चालक का लाइसेंस रद किया जा सकता है
- स्कूल वाहन पर निर्धारित शीशे के अलावा दूसरे शीशे नहीं होने चाहिए
- एक अप्रैल 2014 के बाद और नए वाहन पर जीपीएस फिट होना चाहिए
- हर वाहन में दो सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए
- यदि वाहन में छात्राएं हों तो महिला अटेंडेंट होनी चाहिए
- वाहन को निर्धारित गति पर ही चलाएं