अमर उजाला ब्यूरो
ओढां।
चोरमार खेड़ा के दशमेश सीनियर सेकेंडरी स्कूल की सभागार में श्री गुरुद्वारा साहिब चोरमार के मुख्य सेवादारबाबा कर्म सिंह का भोग, श्रद्धांजलि और गुरमत समागम आयोजित किया गया। इस मौके पर क्षेत्र के अलावा के अलावा पंजाब क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में सिख संगत, गणमान्य व्यक्ति, राजनीतिक व सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने उपस्थित होकर बाबा कर्म सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस समागम में ग्राम पंचायत और अन्य संप्रदायों द्वारा गुरुद्वारा चोरमार साहिब के मुख्य सेवादार की जिम्मेदारी हेड ग्रंथी बाबा गुरपाल सिंह को सौंपते हुए उन्हें विधिवत रूप से पांच पगड़ियां और तलवार भेंट कीं।
इस मौके पर उपस्थित सिख संगत को संबोधित करते हुए तख्त श्रीदमदमा साहब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि मौत एक अटल सच्चाई है, जो सबको आनी है। उन्होंने कहा कि मौत नींद का नाम है और बड़ी नींद मौत बन जाती है। उन्होंने कहा कि आज का समागम बताता है कि संत बाबा कर्म सिंह का क्षेत्र में कितना सत्कार था और उन्होंने पंथ के लिए कितनी सेवा की है। उन्होंने बाबा कर्म सिंह को महान शख्सियत बताते हुए कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी एवं समर्पित भाव से परिपूर्ण इंसान कभी भुलाए नहीं भूलते। उन्होंने कहा कि बाबा कर्म सिंह ने पंथ के लिए नि:स्वार्थ कार्य किया और बिना किसी भेदभाव के सरबत का भला चाहा। वहीं एसजीपीसी की अंतरिम समिति के सदस्य बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला ने भी बाबा कर्म सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बाबा कर्म सिंह ने क्षेत्र में सिख धर्म के प्रचार के साथ-साथ शिक्षा की रौशनी फैलाने का काम भी किया। जिसका उदाहरण दशमेश सीनियर सेकेंडरी स्कूल के रूप में देखा जा रहा है। सत्कार सभा के प्रधान सुखविंद्र सिंह खालसा ने कहा कि बाबा कर्म सिंह सभी धर्मों के लोगों से प्यार करने वाले धर्म निरपेक्ष व्यक्ति थे जिनके पदचिन्हों पर हमें चलना चाहिए। वहीं एडवोकेट रणजीत सिंह, शमशेर सिंह आदि ने भी श्रद्धांजलि भेंट करते हुए कहा कि बाबा कर्म सिंह ने अपने जीवन में कभी भी राजनीतिक तौर पर हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने लोगों को आपसी प्रेम भाईचारे का पाठ पढ़ाया।
इस समागम के दौरान गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी बाबा गुरपाल सिंह को गांव के प्रमुख व्यक्तियों और पंथ के पदाधिकारियों ने गुरुद्वारा साहिब के मुख्य सेेवादार की बागडोर सौंपी। बाबा गुुरपाल सिंह को पांच पगड़ियों को एकत्र कर उन्हें पहनाकर सम्मान स्वरूप तलवार भेंट की गई। बाबा गुरपाल सिंह ने कहा कि बाबा कर्म सिंह शारीरिक रूप से भले ही उनके बीच नहीं है लेकिन वैचारिक रूप से सदा उनके बीच रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षा व पंथ के लिए उनके गुरमत विचारों को आगे बढ़ाया जाएगा।
हेड ग्रंथी को सौंपी मुख्य सेवादार की बागडोर
करीब 50 वर्षीय बाबा गुरपाल सिंह मूल रूप से राजपुरा के रहने वाले हैं। बाबा कर्म सिंह उन्हें किशोर अवस्था मेें ही गुरुद्वारा साहिब मेें ले आए थे। बाबा कर्म सिंह बाबा गुरपाल सिंह को अपने पुत्र की तरह मानते थे। उन्होंने उनका विवाह भी जंडवाला जटान में ही करवाया था, जिसके बाद से बाबा गुरपाल सिंह गुरुद्वारा साहिब के सेवादार के रूप में रहकर यहीं सेवा करने लग गए। जिसके बाद उन्हें हेड ग्रंथी की सेवा सौंपी गई। बाबा गुरपाल सिंह के तीन लड़कियां और एक लड़का है। मुख्य सेवादार बाबा कर्म सिंह के पिछले कुछ समय से अस्वस्थ रहने के चलते गुरुद्वारा साहिब का संचालन बाबा गुरपाल सिंह के पास ही था।
इस मौके पर सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी, हरियाणा पर्यटन निगम के चेयरमैन जगदीश चोपड़ा, विधायक बलकौर सिंह, महिला विकास निगम की चेयरपर्सन रेणू शर्मा, चेयरमैन बलदेव सिंह मांगेआना, महंत शिवानंद केवल, हरियाणा माटी कला बोर्ड के चेयरमैन गुरदेव राही, इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला, बाबा कर्म सिंह के पुत्र डॉ. बलवीर सिंह, प्राचार्य पवन कुमार, सरपंच सरदूल सिंह सिधू, क्लब अध्यक्ष सेवक सिंह, जगसीर सिंह और भाई कन्हैया ट्रस्ट के चेयरमैन गुरविंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।