रोड़ी। भारत निर्वाचन आयोग ने 85 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और 40% से अधिक दिव्यांगजनों को उनकी सहमति के अनुसार घर बैठे मतदान की सुविधा दी है लेकिन 100% दिव्यांग और असमर्थ होने के बावजूद गांव रोड़ी निवासी दिव्यांग गुरपाल सिंह इस सुविधा से वंचित रह गए। इस कारण अब उन्हें शनिवार को सरकारी प्राइमरी स्कूल हरिया राइया पत्ती रोड़ी के 66 नंबर बूथ पर वोट देने जाना पड़ेगा। इसके लिए उन्हें तीन-चार लोगों की मदद लेनी पड़ेगी।
निर्वाचन आयोग की एक टीम 19 मई को गांव रोड़ी में आई। टीम ने इस बड़े गांव में 85 वर्ष से अधिक उम्र की मात्र दो वृद्धाओं के घर पर जाकर मतदान करवाया लेकिन गांव रोड़ी निवासी 100% दिव्यांग गुरपाल सिंह इस सुविधा से वंचित रहे जबकि वह अकेले बैठ या खुद खाना तक नहीं खा सकते। उन्हें उठाकर ले जाना पड़ता है। वह मुंह से लिखते हैं। गुरपाल ने बताया कि उन्होंने बीएलओ मास्टर दर्शन सिंह सुरतिया के समक्ष 66 नंबर बूथ में पंजीकृत अपना वोट घर में देने के लिए सहमति जताई थी।
उन्होंने रिपोर्ट बनाकर आगे भेज दी थी लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की चूक के कारण उन्हें घर बैठे वोट डालने की अनुमति नहीं मिल सकी। वहीं, 66 नंबर बूथ के बीएलओ मास्टर दर्शन सिंह सुरतिया का कहना है कि उन्होंने 85 वर्ष से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों समेत गुरपाल सिंह की पूरी रिपोर्ट बनाकर निर्वाचन आयोग को भेज दी थी लेकिन फिर भी गुरपाल का मतदान घर से न होने का कारण पता नहीं चल सका।