एनजीटी के आदेश पर एक साल पहले 6 गांवों में घर घर से कूड़ा उठाने का टेंडर दिया गया था। प्रशासन के लिए यह काफी महंगा साबित हुआ है। इन गांवों की सफाई के लिए एक ही साल में फर्म ने एक करोड़ पांच लाख रुपये का बिल थमा दिया है। इसमें से 22 लाख की अदायगी फर्म को हो चुकी है। प्रोजेक्ट की समय सीमा और बजट खत्म होने पर अब प्रशासन ने इन गांवों में सफाई की जिम्मेदारी पंचायत कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दी है।
एनजीटी के आदेश अनुसार सिरसा के ऐलनाबाद खंड के 6 गांवों में घरों से कूड़ा उठाने का ठोस कचरा प्रबंधन के तहत मिर्जापुर कलस्टर बनाया गया था। इसमें मिर्जापुर, तलवाड़ा खुर्द, ठोबरिया, अमृतसर कलां, अमृतसर खुर्द, और प्रतापनगर गांव शामिल थे। यह प्रोजेक्ट जुलाई 2019 में शुरू हुआ था और 28 अगस्त 2020 तक चला। इसका टेंडर डिंग मैन पावर एंड सिक्योरिटी सर्विस को मिला था। पहले दो महीने का बिल करीब 22 लाख रुपये ऐलनाबाद बीडीपीओ ने पंचायती फंड से पास कर दिया। टेंडर के समय 175 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कूड़े की अदायगी की जानी थी। इसके बाद नवंबर 2019 से लेकर जून 2020 तक के बिल पास करने को लेकर ऐलनाबाद बीडीपीओ कार्यालय ने 69 लाख 34 हजार रुपये का बिल एडीसी कार्यालय को भेजे। यह बिल नवंबर 2019 से लेकर जून 2020 तक का है। उसके बाद फर्म ने दो महीने का और बिल थमा दिया। मगर एडीसी कार्यालय ने अदायगी करने से मना कर दिया और बीडीपीओ कार्यालय को अपने विभाग से ही इसके बिल पास करने के निर्देश दिए।
15वें वित्त आयोग के बजट से करवाने के निर्देश
डिंग मैन पावर एंड सिक्योरिटी के ठेकेदार बृजलाल का कहना है कि पंचायत विभाग ने 15वें वित्त आयोग के बजट से इस पैसे की अदायगी करवाने के लिए कहा है। इस बजट में 56 लाख रुपये बीडीपीओ के पास था, ज्यादातर बजट को पंचायतें प्रयोग कर चुकी हैं। केवल 15 लाख रुपये ही शेष हैं। ऐसे में इस फंड से उनकी फर्म को अदायगी नहीं हो सकती।
कोट
15वें वित्त आयोग के फंड से पैसा जारी करने का पत्र आया है। फर्म को इसकी अदायगी करवा दी जाएगी। आगे से पंचायतों को ही अपने स्तर पर कूड़ा उठाने के लिए टेंडर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
- सुखविंद्र सिंह, जिला कोर्डिनेटर, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण।
कोट
15वें वित्त आयोग के फंड में अलग-अलग मद के लिए पैसा है। उस फंड में से पहले ही पैसा खर्च हो चुका है। जितनी राशि बची है, उससे 69 लाख रुपये की अदायगी पूरी नहीं हो सकती। इसलिए हमने सरकार को अवगत करवाकर पैसे की डिमांड की है। 6 गांवों में अब पंचायतें सफाई कर्मचारियों से सफाई करवा रही हैं।
- अनिल कुमार, बीडीपीओ, ऐलनाबाद।
कोट
प्रोजेक्ट में फर्म संचालक भारी वजन वाले कचरे को उठवाते थे, लेकिन लिफाफे नहीं। इस प्रोजेक्ट में खामियां थीं। पहले प्रति क्विंटल कूड़े के वजन के हिसाब से पैसे की अदायगी हुई। बाद में पंचायत विभाग ने 168 रुपये प्रति व्यक्ति सालाना कूड़ा खर्च डाल दिया। इससे उनके गांव के विकास कार्य प्रभावित हो गए। प्रशासन यदि इसकी जिम्मेदारी पहले ही पंचायतों को देता तो यह काम सस्ते में होता।
-नरेश मेहता, सरपंच, तलवाडा खुर्द।