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युवाओं के सिर पर सजा गांवों की चौधर का ताज

Tue, 12 Jan 2016 02:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस है। ऐसे में जिले की नई पीढ़ी भी सियासत की सीढ़ी पर चढ़ रही है। सरकार की शर्तों ने लोकतंत्र की नर्सरी में युवाओं के दाखिले के रास्ते खोल दिए हैं। गांवों की चौधर का ताज युवाओं के सिर पर सज गया है।
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रोहतक और सांपला ब्लॉक में पिछले चुनावों के मुकाबले औसतन 10 साल कम उम्र के सरपंच बने हैं। 21 से 35 साल की उम्र वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। गिने चुने गांवों में ही बुजुर्गों को सरपंची मिली है। रविवार को चुनाव जीतने वाले 21 सरपंच तो ऐसे हैं, जो 21 साल की उम्र पार करते ही सरपंच बन गए।

गद्दी खेड़ी की सरपंच बनी गोरखपुर की रहने वाली मीना भी 21 साल की हैं। इस तरह ही सांपला के अधिकतर गांवों में 21 से 35 उम्र के युवाओं को सरपंची मिली है। लव मैरिज के बाद सरपंच बनीं गांधरा की रजनी भी 23 साल की हैं तो दस गांवों में 35 साल से कम उम्र के सरपंच चुने गए हैं।
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पहले चरण में रोहतक के 47 और सांपला के 21 गांवों में चुनाव हुए। सरकार की शर्तों के कारण इस बार चुनाव का रंग भी बदला है और चौधर का चेहरा भी। पहले जहां अधिकतर सरपंच बुजुर्ग बनते थे, वहीं इस बार युवाओं ने बाजी मार ली है। रोहतक ब्लॉक के 47 गांवों में 2 युवा पहले ही निर्विरोध सरपंच चुने जा चुके हैं।
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