रोहतक। एएसजे शैलेंद्र सिंह की अदालत ने जानलेवा हमले के 10 साल पुराने केस में सोनीपत जिले के गांव रुखी के युवक विकास को बरी कर दिया। विकास पर आरोप था कि बोहर गांव के युवक मनीष को गोली मारने के आरोपी युवक को पिस्तौल व 10 कारतूस उपलब्ध कराए हैं। पुलिस आरोपों को साबित नहीं कर सकी।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बोहर निवासी मनीष ने मार्च 2015 में अर्बन एस्टेट थाने में शिकायत दी थी कि वह दूधिया का काम करता है। तड़के 5 बजे घर से शौच के लिए निकला था। लीले के मकान के पास पहुंचा तो गांव का युवक नवीत आया और पीछे से दो गोली मारी थी। एक गोली कूल्हे तो दूसरी कंधे में लगी थी।
उसने पीछे मुड़कर देखा तो बाइक सवार दो युवक भा गए। षड्यंत्र के तहत किसी ने उस पर हमला कराया है। पुलिस की जांच में चार आरोपियों जयनारायण, नवीत, रोहित व विकास का नाम सामने आया। 2018 में अदालत ने जयनारायण व रोहित को बरी कर दिया था।
केवल नवीत को जानलेवा हमले के आरोप में दोषी ठहराया गया था। साथ ही, पुलिस ने अदालत में दाखिल आरोप पत्र में कहा था कि विकास ने आरोपी नवीत को 50 हजार रुपये में एक पिस्तौल व 10 कारतूस उपलब्ध कराए।
पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत विकास को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी जमानत पर चल रहा था। एएसजे शैलेंद्र सिंह की कोर्ट ने कहा है कि पुलिस व शिकायतकर्ता पक्ष आरोपी विकास के खिलाफ ठोस सबूत नहीं दे सका। ऐसे में उसे बरी किया जाता है।