संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में योग विभाग की तरफ से साप्ताहिक राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस दौरान कुलपति जेपी यादव ने कहा कि योग हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा से सहायक प्राध्यापक डॉ. अजयपाल रहे। अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले एवं योग विभागाध्यक्ष, कार्यशाला की निर्देशिका प्रोफेसर मंजू परूथी ने मुख्य वक्ता एवं सभी विद्यार्थियों का स्वागत किया।
मुख्य वक्ता डॉ. अजयपाल ने मर्म चिकित्सा के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि मर्म शरीर में स्थित 107 ऊर्जा केंद्र होते हैं, जिन पर आघात से मृत्यु तक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इन ऊर्जा केंद्रों को सही तरीके से संचालित किया जाना स्वास्थ्य समस्याओं का तत्काल निवारण करने में सहायक होता है। उन्होंने पीपीटी के माध्यम से इन मर्म केंद्रों की पहचान और उनके प्रभाव को समझाया। प्रतिभागियों को इसका अभ्यास कराया।
कुलपति प्रोफेसर जेपी यादव ने कार्यशाला के आयोजन के लिए सभी टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मनुष्य का पहला धर्म निरोगी काया को प्राप्त करना है। योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक संतुलन को भी बेहतर बनाने में सहायक है। आज के इस तेजी से विकसित होते हुए आधुनिक युग में जहां तकनीकी प्रगति ने मनुष्य को भौतिक रूप से तो समृद्ध किया है, वहीं दूसरी ओर हम अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से दूर हो गए हैं। इस कारण शारीरिक और मानसिक समस्याओं में वृद्धि हो रही है। योग ही वह मार्ग है जो हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।
अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले एवं योग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मंजू परूथी ने कहा कि योग का महत्व आज के समय में बहुत बढ़ चुका है। यह कार्यशाला हमें योग के माध्यम से जीवन की एक नई दिशा दिखाने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेंगी।
मुख्य वक्ता डॉ. अजयपाल को योग विभाग द्वारा स्मृति चिन्ह व शाल भेंट कर सम्मानित किया गया।