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गांधी चाहते तो रुक सकती थी भगत सिंह की फांसी, अब याकूब की फांसी पर सियासी बवंडर क्यों

Sat, 01 Aug 2015 02:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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याकूब की फांसी रुकवाने के लिए देश के नामी वकील आधी रात को कोर्ट पहुंचते हैं।
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सैकड़ों जान लेने वाले मुंबई धमाकों के गुनहगार की फांसी पर देश में सियासी बवंडर मचा है।

भगत सिंह के पौत्र यादवेंद्र सिंह सिंधु ने इसे देशवासियों और शहीदों के लिए पीड़ा की बात बताया है।

उन्होंने सवाल उठाया है कि जब भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी जा रही थी तो महात्मा गांधी चुप रहे।

 अगर महात्मा गांधी सख्ती बरतते तो फांसी रुक सकती थी। आज एक आतंकी के लिए देश के कुछ बुद्धिजीवी और राजनेता दुख जता रहे हैं, यह अफसोस की बात है।

सिंधु शुक्रवार को शहीद उधम सिंह के शहीदी दिवस पर रोहतक में हुए एक कार्यक्रम में पहुंचे थे।
अंहिसा के नुमाइंदे तब चुप क्यो
सिंधू ने सवाल उठाया कि अंहिसा के नाम पर इतना हल्ला क्यों मचा रहा है। जब भगत सिंह को फांसी दी गई तब भी अंहिसा के पुजारी गांधी चुप थे, जबकि भगत सिंह ने तो किसी की हत्या के लिए बम नहीं फेंका था। सिंधु का आरोप है कि याकूब की फांसी रोकने की अपील करने वालों में गांधी के वंशज का नाम भी सामने आ रहा है। अब याकूब पर तो सैकड़ों बेगुनाहों की हत्या का आरोप है तो भी शोर मचाया जा रहा है।
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15 अगस्त को शहीदों की वैधानिक सूची जारी करें मोदी
सिंधु ने प्रधानमंत्री मोदी से मांग की है कि 15 अगस्त को वे आजादी की लड़ाई में शहीद हुए देशभक्तों की वैधानिक सूची जारी करें। पीएमओ कार्यालय तक से लगातार मांग की जा रही है।
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