फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak News: विश्व हृदय दिवस आज...पीजीआई में रोज आते हैं दिल के 150 मरीज, दो मरीजों की हो पाती है सर्जरी

विज्ञापन
पीजीआई में 12 सितंबर 1999 को पहली ओपन हार्ट सर्जरी के अवसर पर अमर उजाला में प्रका​शित खबर। संवा - फोटो : samvad
विज्ञापन
अभिषेक कीरत
विज्ञापन

रोहतक। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआई में आकर भी दिल के रोगियों का दर्द कम नहीं हो पा रहा है। पीजीआई की ओपीडी में रोज करीब 150 मरीज हृदय रोग के आते हैं। इसमें ओपन हार्ट सर्जरी वाले छह से आठ मरीज होते हैं। शेष में दिल के छेद, सीने में दर्द, ईसीजी व अन्य रोगों से पीड़ित मरीज होते हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण दो रोगियों की ही ओपन हार्ट सर्जरी हो पाती है।
हृदय रोग विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को दिल्ली या निजी संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है। वर्ष 1999 में शुरू हुए विभाग में इलाज की पुरानी तकनीक ही इस्तेमाल हो रही है जबकि निजी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा है। ऑपरेशन के लिए चुने जाने वाले चार में दो ही गंभीर मरीजों का मुश्किल से ऑपरेशन हो पाता है। चिकित्सकों की संख्या बढ़ने से ऐसे मरीजों को राहत मिल सकती है। चिकित्सकों के रिक्त पद भरने के लिए संस्थान प्रबंधन ने भी प्रयास किए जाने का दावा किया है।
विज्ञापन

इधर, संस्थान में करीब ढाई दशक पहले शुरू हुए हृदय रोग विभाग में इलाज की तकनीकी सुविधाएं भी उसी जमाने की हैं। इसके विपरीत निजी संस्थानों में एआई व रोबोटिक तकनीक से ओपन हार्ट सर्जरी होने लगी है। संस्थान में इन सुविधाओं के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। संवाद
-
हृदय प्रत्यारोपण की सुविधा देने है तैयारी
पीजीआई के हृदय रोग विभाग में हृदय प्रत्यारोपण की सुविधा की भी तैयारी की जा रही है। इसी कड़ी में कमेटी का गठन किया गया है। प्रत्यारोपण के लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा चुका है। अब लाइसेंस मिलने का इंतजार है। फिलहाल, मरीजों को हृदय प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ के अलावा निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
-
नई तकनीक इलाज में हो सकती है कारगर साबित
हृदय रोग संबंधी इलाज में नई तकनीक कारगर साबित हो सकती है। हृदय दोषों से ग्रसित बच्चोें की सर्जिकल देरी दूर करने के लिए प्रदेश के गांवों में जांच केंद्र बनाए जा सकते हैं। युवाओं को गेमिफाइड एप के जरिए रोचक तरीके से हृदय रोगों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा सकता है। विश्व हृदय महासंघ भी इसका समर्थन करता है।

अलर्ट...इस कारण दिल दे रहा है दगा
हृदय विशेषज्ञ डॉ. एसएस लोेहचब ने बताया कि तनाव, जंक फूड, व्यायाम से दूरी, प्रदूषण व नशे के कारण हृदय संबंधी रोग बढ़ रहे हैं, इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर ही हृदय संबंधी रोगों से बचा जा सकता है। व्यायाम, खान-पान में जंक फूड के स्थान पर फल-सब्जियां खाना व तनाव प्रबंधन कर हृदय को तंदरुस्त रखा जा सकता है।
-
तीन प्रकार के हृदय रोगों से ग्रस्त हैं ज्यादातर लोग
जब हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिलता है तो व्यक्ति को कोरोनरी धमनी रोग के लक्षण अनुभव हो सकते हैं। इसमें रोगी को सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं। प्रदूषण इसका मुख्य कारण है। रुमेटिक हृदय रोग, हृदय के वाॅल्व को नुकसान पहुंचाता है। यह आमतौर पर करीब 20 से 40 उम्र के लोगों में मिल रहा है। जन्मजात हृदय रोग, इसमें शिशु के हृदय की संरचना में गड़बड़ होती है जोे हृदय की काम करने की क्षमता को प्रभावित करता है।

अमर उजाला ने 1999 में प्रकाशित की थी पहली सर्जरी की खबर

पीजीआई में 12 सितंबर 1999 को पहली ओपन हार्ट सर्जरी की गई थी। अमर उजाला ने सबसे पहले यह खबर प्रकाशित की। इसकी प्रति को फेम में लगाकर विभाग में संजोया गया है।
विज्ञापन

-
संस्थान के हृदय रोग विभाग में हृदय प्रत्यारोपण सुविधा लाने के लिए प्रयास जारी है। इसके लिए लाइसेंस की मंजूरी नहीं मिली है। विभाग में छह में दो डॉक्टर हैं। इस कमी को भी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें