रेवाड़ी। एक जुलाई से शुरू की गई बीवी जी राम जी योजना को लेकर कई संगठनों ने सवाल उठाते हुए इसे मजदूरों के हितों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि यह योजना मनरेगा की जगह लेने का प्रयास है। यह रोजगार की गारंटी देने में सक्षम नहीं है।
स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि नई योजना में रोजगार मांगने के 15 दिन के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है लेकिन इसके भुगतान और राशि को लेकर स्पष्ट नियम तय नहीं किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों से विकास कार्यों के चयन का अधिकार छीन लिया गया है। अब यह निर्णय केंद्र सरकार की ओर से किया जाएगा। इससे स्थानीय आवश्यकताओं की अनदेखी हो सकती है। एआईयूटीयूसी के राज्य अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने भी योजना की आलोचना करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण मजदूरों को मनरेगा जैसी रोजगार सुरक्षा नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका सीमित होने से स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य प्रभावित होंगे।