पीजीआईएमएस के सी-ब्लॉक में आए एक मजदूर ने तोड़फोड़ करने के बाद फांसी लगा आत्महत्या करने का प्रयास किया। मौके पर मामला बिगड़ता देखकर सुरक्षा गार्डों को बुलाया गया तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर व्यक्ति को फंदे पर झूलने से बचाया। आत्महत्या का प्रयास करने वाला युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार शनिवार को देर सायं बिहार के गया जिले का रहने वाला एक मजदूर पीजीआईएमएस के सी-ब्लॉक में आया और कहा कि उसकी कोरोना संक्रमण की जांच की जाए। इस पर डॉक्टर ने उसे कहा कि उसे कोई लक्षण नहीं है और न ही उसे जांच की जरूरत है, वह कार्ड पर लिख भी देते हैं। इस पर भी वह नहीं माना और बार-बार जांच करवाने की जिद करने लगा। डॉक्टरों ने उसकी बात मानते हुए सैंपल ले लिया और कहा कि वह यहां से चला जाए, यदि यहां कोई पॉजिटिव मरीज आता है तो वह भी संक्रमित हो जाएगा। बार-बार कहने के बाद भी वह वहां से नहीं गया और वह वहीं एक कमरे में घुस गया और अंदर से कमरा बंद कर लिया। उक्त व्यक्ति ने बेड शीट के सहारे पंखे से फंदा लगाने का प्रयास भी किया। लेकिन डॉक्टर ने सुरक्षा गार्डों को बुलाकर कमरे का दरवाजा तुड़वा कर उसे बचा लिया। व्यक्ति ने मौके पर शीशा और फोन भी तोड़ दिया और स्टूल से खुद पर वार किया। इसके बाद सुरक्षा गार्ड व्यक्ति को बाहर ले आए और पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पुलिस ने युवक से बात की और बताया जा रहा है कि एंबुलेंस से उसे क्वारंटीन सेंटर पर छोड़ा गया। यहां से भी वह भाग निकला और आर्य नगर में पकड़ा गया। स्टाफ व डॉक्टरों की मानें तो उक्त व्यक्ति मानसिक रोगी लग रहा था। उसे सनक थी कि उसकी जांच रिपोर्ट उसे दी जाए। हालांकि इस संबंध में पुलिस प्रशासन ने किसी लिखित शिकायत के मिलने से मना किया है।
मनोरोग चिकित्सक न होने का भुगता खामियाजा
कोविड के संक्रमण काल में लोग मानसिक रूप से परेशान हैं। इसके बावजूद आपात विभाग में भी मनोरोग चिकित्सकों की ड्यूटी नहीं लगी है। इस विभाग ने तो ओपीडी करने से ही मना कर दिया है।
सी-ब्लॉक में एक व्यक्ति के आत्महत्या करने के प्रयास के साथ तोड़फोड़ करने का मामला संज्ञान में आया है। वह व्यक्ति मानसिक रोगी हो सकता है। कोविड के संक्रमण काल में लोग तनाव में अधिक हैं। इसलिए एंबुलेंस मंगा कर उसे स्वास्थ्य विभाग के हवाले कर दिया था। इसके बाद की जानकारी नहीं है।
डॉ. ध्रुव चौधरी, प्रमुख नोडल अधिकारी, कोविड, पीजीआईएमएस