रोहतक। कोरोना की दूसरी लहर में सामने आई ऑक्सीजन की किल्लत कहीं तीसरी लहर में भी भारी न पड़ जाए। पीजीआई में लगाने वाले तीन ऑक्सीजन प्लांट में से एक ही पूरी तरह स्थापित हो पाया है। अभी दो प्लांट का काम अधूरा है। इनमें से एक प्लांट ऑपरेशन थियेटर से जोड़ दिया गया है। अब इससे 750 बेड भी जोड़े जाने हैं, जबकि एक प्लांट का काम अभी शुरू ही नहीं हुआ है। समय रहते प्लांट पूरी तरह चालू नहीं हुए तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। इधर, पीजीआई प्रशासन ने शीघ्र ही तीनों प्लांट का काम पूरा होने का दावा किया है।
प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआई में अब तक मरीजों की सुविधा के लिए ऑक्सीजन प्लांट नहीं था। यहां 10 हजार लीटर तरल ऑक्सीजन क्षमता के तीन टैंक थे। पहली बार कोरोना की दूसरी लहर में यहां ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना बनी थी। इसके तहत एक प्लांट ही अब तक लग पाया है। एक प्लांट से बेड जोड़े जाने शेष हैं। जबकि एक प्लांट लगाने का काम शुरू होना बाकी है। दूसरी लहर के दौरान तेजी से शुरू हुआ ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम इस लहर के शांत होने साथ ही थम गया है। काम क्यों रुका है, इस बारे में स्थिति अस्पष्ट है। इस बारे में कोई भी बोलने को भी तैयार नहीं है। फिलहाल प्लांट का काम सुस्त होने से तीसरी लहर में ऑक्सीजन किल्लत होने का खतरा भी बढ़ गया है।
ओटी के बाद 750 बेड जोड़ने का काम बाकी
संस्थान में लाला श्याम लाल सुपरस्पेशलिटी भवन के पास एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लग चुका है। दूसरा प्लांट माड्यूलर ऑपरेशन थियेटर के पास लगा है। इस 833 लीटर क्षमता वाले प्लांट को ओटी से जोड़ दिया गया है। प्लांट से वार्ड के 750 बेड जोड़ने का काम बाकी है। जल्दी ही यह काम पूरा हो जाएगा। तीसरा एक हजार लीटर क्षमता का प्लांट पुरानी सीएसडी के बाहर लगाया जाना है।
वर्जन
ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम जारी है। संस्थान में दो प्लांट लग गए हैं। तीसरा प्लांट लगाया जाना है। मरीजों की सुविधा के लिए 750 बेड भी ओटी के साथ वाले प्लांट से जोड़े जाने हैं। यह काम भी जल्द पूरा हो जाएगा। तीसरी लहर की तैयारियों पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
- डॉ. पुष्पा दहिया, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस।